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इकलौती बेटी के निधन के बाद प्रौढ़ दंपती को फिर माता-पिता बनने की अनुमति मिली
26-Apr-2026 12:12 PM
इकलौती बेटी के निधन के बाद प्रौढ़ दंपती को फिर माता-पिता बनने की अनुमति मिली

हाईकोर्ट ने कहा- मातृत्व-पितृत्व का सुख जीवन के अधिकार का हिस्सा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 26 अप्रैल। अपनी इकलौती बेटी की असमय मौत के गहरे सदमे से उबरने के लिए एक प्रौढ़ दंपती ने फिर से माता-पिता बनने की इच्छा जताई। प्रकरण के मानवीय पहलू को समझते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उन्हें इन विट्रो फर्टिलाइजेशन के जरिए संतान प्राप्ति की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने संबंधित क्लीनिक को तुरंत प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं।

यह फैसला जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने सुनाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि माता-पिता बनने का सुख संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।

याचिका बिलासपुर के हाईकोर्ट कॉलोनी में रहने वाली 49 वर्षीय महिला और उनके 55 वर्षीय पति ने दायर की थी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2022 में उनकी इकलौती बेटी का निधन हो गया था। इस दुखद घटना ने उन्हें मानसिक और भावनात्मक रूप से तोड़ दिया था। लंबे समय बाद जब वे इस सदमे से उबर पाए, तब उन्होंने दोबारा परिवार बसाने का निर्णय लिया।

दंपती ने बिलासपुर के एक निजी आईवीएफ सेंटर में संपर्क किया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें चिकित्सकीय रूप से सक्षम पाया। बावजूद इसके, उनकी उम्र का हवाला देते हुए इलाज शुरू करने से मना कर दिया गया।

डॉक्टरों ने बताया कि सहायक प्रजनन तकनीक, आर्ट के एक्ट 2021 के सेक्शन 21(जी) के अनुसार पुरुष की अधिकतम उम्र 55 वर्ष और महिला की 50 वर्ष निर्धारित है। फरवरी 2026 में पति की उम्र 55 वर्ष पार होने के कारण तकनीकी आधार पर उपचार से इनकार कर दिया गया।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने नियमों की सख्त व्याख्या के बजाय मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। कोर्ट ने दंपती को आईवीएफ के माध्यम से संतान प्राप्ति की अनुमति देते हुए क्लीनिक को तुरंत प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया।


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