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रायपुर, 24 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में विदेशी फंडिंग के इस्तेमाल को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि अमेरिकी एजेंसी से जुड़े फंड के तहत करीब 6.5 करोड़ रुपये बस्तर और धमतरी जिलों में खर्च किए गए। ईडी के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि विदेशी बैंक डेबिट कार्ड के माध्यम से भारत में बड़ी मात्रा में नकदी निकाली जा रही थी। इस नकदी का उपयोग संदिग्ध गतिविधियों में किए जाने की आशंका जताई गई है।
मामले की जांच के दौरान एजेंसी ने केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से मीका मार्क नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उससे पूछताछ के बाद जांच को और आगे बढ़ाया गया और कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। ED ने बताया कि इस मामले में 18 और 19 अप्रैल को देशभर में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया था। इस दौरान विभिन्न राज्यों के छह ठिकानों पर छापेमारी की गई, जहां से कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद हुए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि यह मामला “The Timothy Initiative (TTI)” नामक संगठन से जुड़ा हो सकता है, जो ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार से संबंधित गतिविधियों में कार्य करता है। एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि विदेशी फंडिंग का वास्तविक उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया गया। प्रवर्तन निदेशालय अब यह पता लगाने में जुटा है कि यह धनराशि किन-किन गतिविधियों में खर्च की गई और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। शुरुआती जांच में मनी ट्रेल और विदेशी फंडिंग नेटवर्क की कड़ियां सामने आई हैं।अधिकारियों के अनुसार, यह एक व्यापक नेटवर्क से जुड़ा मामला हो सकता है, जिसकी जांच अभी जारी है। ED ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं और कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। फिलहाल एजेंसी सभी दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की गहन जांच कर रही है ताकि पूरे फंडिंग नेटवर्क की सच्चाई सामने लाई जा सके। ईडी ने लुक आउट नोटिस भी जारी किया है।


