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बेंगलुरु में सीईटी के दौरान परीक्षार्थियों को जनेऊ उतारने को मजबूर करने को लेकर विवाद
24-Apr-2026 9:02 PM
बेंगलुरु में सीईटी के दौरान परीक्षार्थियों को जनेऊ उतारने को मजबूर करने को लेकर विवाद

बेंगलुरु, 24 अप्रैल। शहर के कृपानिधि कॉलेज में आयोजित सीईटी परीक्षा के दौरान पांच ब्राह्मण छात्रों को अपना जनेऊ उतारने के लिए मजबूर किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है।

इस घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सत्ताधारी कांग्रेस पर जमकर हमला बोला और इसे “हिंदू विरोधी” करार दिया।

व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए छात्रों का चयन करने के वास्ते साझा प्रवेश परीक्षा (सीईटी) आयोजित की जाती है।

छात्रों ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि मडिवाला स्थित कॉलेज के परीक्षा कक्ष में मौजूद निरीक्षकों ने उनसे कहा कि यदि वे परीक्षा देना चाहते हैं, तो जनेऊ उतारें।

पिछले साल इसी तरह का विवाद होने पर सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि सीईटी परीक्षा के दौरान जनेऊ उतारने को नहीं कहा जाएगा। हालांकि, उसके बावजूद इस साल भी छात्रों को इसी तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ा।

एक छात्र ने कहा, “जब मैं परीक्षा केंद्र गया, तो शिक्षकों ने मेरी बाली उतरवा दी। मैं यह समझ सकता हूं, क्योंकि वहां धातु की कोई वस्तु पहनने की अनुमति नहीं है, लेकिन उन्होंने मुझे शरीर से जनेऊ भी उतारने के लिए मजबूर किया।”

कोई और विकल्प न होने के कारण, छात्र ने निरीक्षकों के आदेश का पालन किया।

सूत्रों के अनुसार, परीक्षा समाप्त होने के बाद छात्रों के माता-पिता परीक्षा स्थल पर पहुंचे और उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि जब जनेऊ न हटाने के संबंध में स्पष्ट निर्देश थे, तो फिर इसके पीछे क्या उद्देश्य था।

कुछ अन्य छात्रों ने आरोप लगाया कि कलाई पर बंधा लाल और पीला कलावा भी पर्यवेक्षकों ने हटवा दिया था।

जब शिवमोग्गा, बीदर और कुछ अन्य स्थानों पर इसी तरह का विवाद सामने आया, तो राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री एम.सी. सुधाकर ने अभिभावकों को आश्वासन दिया कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अभिभावकों ने आरोप लगाया कि पिछले साल मुख्यमंत्री ने भी अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे छात्रों से जनेऊ हटाने के लिए न कहें। फिर भी, बृहस्पतिवार को वही घटना दोहराई गई।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के “हिंदू विरोधी कृत्य”, जैसे ‘मंगलसूत्र’ और ‘जनिवार’ (जनेऊ) को जबरन हटवाना, बिना किसी रोक-टोक के जारी हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि पिछले साल, सीईटी और नीट परीक्षाओं के दौरान, कांग्रेस सरकार ने जनेऊ काट दिया था और केपीएससी परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवारों को मंगलसूत्र उतारने के लिए मजबूर किया था। इस साल भी, सरकार ने वही पुरानी प्रथा जारी रखी है।

अशोक ने आरोप लगाया, “कांग्रेस सरकार के हिंदू विरोधी कुकृत्य, जैसे लोगों को मंगलसूत्र और जनिवार हटाने के लिए मजबूर करना, जारी हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस शासन के तहत, एक तरफ हिंदुओं को कोई सुरक्षा नहीं मिल रही है, और दूसरी तरफ वह हिंदू मान्यताओं और रीति-रिवाजों पर इस तरह हमला करके घटिया राजनीति में लिप्त है।

उन्होंने कहा कि सीईटी परीक्षा के प्रवेश पत्र या किसी अन्य दिशानिर्देश में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया गया था कि ‘जनिवार’ नहीं पहना जाना चाहिए, और उन्होंने जानना चाहा कि सरकार इसे हटाने के लिए क्यों मजबूर कर रही है और इस अन्याय और ज्यादती के लिए कौन जिम्मेदार है।

अशोक ने आरोप लगाया, “राज्य में कांग्रेस, जिसे आधुनिक मुस्लिम लीग सरकार भी कहा जाता है, ने अनौपचारिक रूप से शरिया कानून लागू कर दिया है। एक तरफ सरकार ने रमजान के महीने में उर्दू माध्यम के स्कूलों का समय बदल दिया है, वहीं दूसरी तरफ परीक्षा जांच के नाम पर मंगलसूत्र उतारने और जनिवार काटने की अनुमति दे रही है।”

उन्होंने कांग्रेस को ‘हिंदू विरोधी’ बताया। (भाषा)


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