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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जांजगीर-चांपा, 24 अप्रैल। नवागढ़ पुलिस ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में बैंक की सुरक्षा प्रणाली को भेदने वाला कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि एचडीएफसी बैंक का ही एक कर्मचारी निकला। पुलिस ने 20.40 लाख रुपये की ठगी के इस नेटवर्क में शामिल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार, राछाभाठा स्थित एचडीएफसी बैंक शाखा में कार्यरत टीकाराम श्रीवास इस पूरे रैकेट का मुख्य तकनीकी सूत्रधार था। उसने नियमों को दरकिनार कर फर्जी दस्तावेजों के जरिए छह “म्यूल अकाउंट” खुलवाए और बैंक की निगरानी प्रणाली से संदिग्ध लेन-देन को बचाते हुए रकम को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने में मदद की। इसके बदले उसे कमीशन मिलता था।
इस गिरोह का संचालन लक्ष्मी वस्त्रालय का संचालक राजेश्वर साहू कर रहा था, जो ग्रामीणों को बहलाकर उनके दस्तावेज जुटाता और पूरे नेटवर्क को जोड़ने का काम करता था। वहीं गौतम देवांगन जैसे खाताधारकों ने लालच में आकर अपने खाते उपलब्ध कराए, जिससे असली अपराधियों की पहचान छिपी रही।
ननकी गौड़ की भूमिका भी अहम रही, जो गांव-गांव घूमकर लोगों से आधार कार्ड और फोटो लेकर खाते खुलवाता था और इस अवैध चेन को मजबूत करता था।
नवागढ़ थाना प्रभारी कमलेश शेंडे और उनकी टीम ने जब छह संदिग्ध खातों की जांच की, तो वर्ष 2023-24 के दौरान 20.40 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ। कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया।
फिलहाल चार आरोपी पुलिस हिरासत में हैं, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।


