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चार घंटे में पोर्ट तक पहुंच सकेंगे
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 19 अप्रैल। रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर दिसंबर पूरा होगा। बताया गया कि कोंडागांव जिले टनल कार्य में देरी की वजह से परियोजना पिछड़ गई है।
एनएचएआई के एक अफसर ने 'छत्तीसगढ़' से चर्चा में बताया कि कांकेर जिले के आखिरी गांव से कोंडागांव के पहले गांव तक सिक्स लेन टनल का काम चल रहा है। एक हिस्से का काम जून तक पूरा हो जाएगा। बाकी काम में दो-तीन महीने और लगेंगे। टनल और सड़क का कुछ हिस्सा बाकी रह गया। इस सड़क पर दिसंबर में यातायात शुरू हो पाएगा।
भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर यात्रा समय घटाने के साथ-साथ क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगा।
वर्तमान में जगदलपुर से विशाखापट्टनम की दूरी तय करने में ओडिशा के कोरापुट और जयपुर के घाटों से होकर 7 से 9 घंटे का समय लगता है। नया कॉरिडोर तैयार होने के बाद यह यात्रा घटकर लगभग 3.5 से 4 घंटे रह जाएगी। घाट-मुक्त और सीधा मार्ग होने से परिवहन लागत में भी कमी आएगी, जिससे व्यापार को लाभ मिलेगा।
यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के रायपुर, धमतरी, कांकेर और कोंडागांव जिलों से होकर गुजरेगा। जगदलपुर को इससे जोड़ने के लिए ओडिशा के नबरंगपुर स्थित दासपुर इंटरचेंज अहम कड़ी बनेगा, जहां से बस्तर का ट्रैफिक सीधे कॉरिडोर में शामिल हो सकेगा और विशाखापट्टनम पोर्ट तक पहुंच आसान होगी।
यह बताया गया कि कॉरिडोर का सबसे बड़ा प्रभाव बस्तर की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। क्षेत्र की अरेबिका कॉफी, जैविक इमली, महुआ उत्पाद और ढोकरा शिल्प जैसे उत्पाद कम लागत में बंदरगाह तक पहुंच सकेंगे, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।
परियोजना से बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जैसे क्षेत्रों में रोजगार और निवेश के नए अवसर भी सृजित होंगे।
पर्यटन के लिहाज से भी यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण साबित होगा। बस्तर दशहरा, दंतेश्वरी मंदिर, कुटुमसर गुफा, चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
परियोजना के तहत कांकेर जिले के केशकाल क्षेत्र में 2.79 किमी लंबी ट्विन-ट्यूब टनल का निर्माण किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ की पहली ऐसी सुरंग होगी। इसे पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है, जिसमें वन्यजीवों के आवागमन के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
करीब 16,491 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा 464 किमी लंबा यह कॉरिडोर बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के आर्थिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखता है। यह परियोजना क्षेत्र को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए राज्य के समग्र और संतुलित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि यह कॉरिडोर बस्तर सहित पूरे प्रदेश के लिए विकास का नया द्वार खोलेगा और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंच दिलाएगा। वहीं उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के अनुसार, परियोजना से कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी तथा व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।


