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उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में अपने अध्ययन काल के अनुभव साझा किए तथा वहाँ प्रवेश की प्रक्रिया, चयन मानदंड और प्रशिक्षण प्रणाली की विस्तृत जानकारी प्रतिभागियों को दी।
हीरा मानिकपुरी ने करियर और परिवार के संतुलन पर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने कहा कि कलाकार को अपने हुनर और मेहनत से इस स्तर तक पहुँचना चाहिए कि माता-पिता स्वयं उसके कला क्षेत्र में आगे बढ़ने पर गर्व करें और समर्थन दें।
अभिनय को परिभाषित करते हुए उन्होंने इसे एक निरंतर चलने वाली ‘खोज’ बताया। उनके अनुसार, एक कलाकार अपने भीतर विभिन्न चरित्रों को तलाशता है और उन्हें मंच पर जीवंत करता है। सत्र के दौरान उन्होंने थिएटर के वैश्विक बाजार की वर्तमान स्थिति पर भी चर्चा की और बताया कि स्थानीय कलाकार किस प्रकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
तकनीकी बारीकियों का व्यावहारिक ज्ञान
हीरा मानिकपुरी ने निर्देशन, अभिनय, दृश्य निर्माण (विजुअल्स) सहित रंगमंच के विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि मंच पर प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए किन-किन बारीकियों पर ध्यान देना आवश्यक है।
उनके अनुभवों और मार्गदर्शन ने कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों को रंगमंच के प्रति एक नई, सकारात्मक और पेशेवर दृष्टि प्रदान की।


