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मां के अंतिम संस्कार के लिए रीति-रिवाजों के बजाय तर्कसंगत दृष्टिकोण को चुना : आईएएस अधिकारी
10-Apr-2026 8:28 PM
मां के अंतिम संस्कार के लिए रीति-रिवाजों के बजाय तर्कसंगत दृष्टिकोण को चुना : आईएएस अधिकारी

बीड, 10 अप्रैल। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के महाराष्ट्र कैडर के अधिकारी तुकाराम मुंढे ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने अपनी मां के अंतिम संस्कार के दौरान ‘‘वैज्ञानिक सोच से प्रेरित एक संवेदनशील और तर्कसंगत दृष्टिकोण को जानबूझकर अपनाया’’।

मुंढे ने सोशल मीडिया मंच पर एक पोस्ट में बताया कि बीड के उनके पैतृक गांव ताडसोंगा में मां का अंतिम संस्कार करने के बाद, परिवार ने अस्थियों को पानी में विसर्जित करने के बजाय, उसे अपनी कृषि भूमि में दफनाने और उस स्थान पर बरगद का एक पेड़ लगाने का विकल्प चुना।

उन्होंने पोस्ट में कहा, ‘‘प्रकृति इस ब्रह्मांड की सृष्टिकर्ता और सर्वोच्च शक्ति है। प्रकृति की रक्षा करना, उसका पोषण करना और उसका सम्मान करना ही सच्ची भक्ति और श्रद्धांजलि है।’’

आईएएस अधिकारी ने कहा कि बरगद का पेड़ लगाने से उनकी मां का प्यार और आशीर्वाद पीढ़ियों तक जीवित रहेगा।

उन्होंने बताया कि परिवार ने अंतिम संस्कार की परंपराओं से हटकर तीन दिनों के भीतर सभी रस्में पूरी करने और दसवें और तेरहवें दिन की रस्मों, जिन्हें ‘दहावा’ और ‘तेरावा’ के नाम से जाना जाता है, को छोड़ने का विकल्प चुना।

मुंढे ने रेखांकित किया कि आधुनिक समाज को कर्मकांडीय प्रथाओं के बजाय वैज्ञानिक सोच, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उपयोगिता को प्राथमिकता देनी चाहिए।

महाराष्ट्र सरकार ने 31 मार्च को मुंढे का तबादला कर दिया था। नौकरशाह के रूप में उनके 21 साल के करियर में यह 24वां तबादला है।

मुंढे का दिव्यांग कल्याण विभाग से तबादला कर राजस्व एवं वन विभाग में उन्हें आपदा प्रबंधन, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन सचिव के पद पर नियुक्त किया गया। (भाषा)


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