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कोल इंडिया की इकाई एसईसीएल ने सात खनन अवशेषों के ढेरों की पहचान की,दुर्लभ खनिज की करेगी खोज
25-Feb-2026 12:17 PM
कोल इंडिया की इकाई एसईसीएल ने सात खनन अवशेषों के ढेरों की पहचान की,दुर्लभ खनिज की करेगी खोज

नयी दिल्ली, 25 फरवरी। कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने दुर्लभ खनिजों के संभावित निष्कर्षण के लिए खनन अवशेषों के सात ढेरों (डंप) की पहचान की है। यह जानकारी कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने दी।

खदान ‘डंप’ से तात्पर्य खदान के कचरे या खनन अवशेषों के ढेर से है।

एसईसीएल की यह पहल कोयला खदान अपशिष्ट से मूल्य सृजन को बढ़ावा देने की सरकार की पहल के अनुरूप है। प्रमुख कोयला क्षेत्रों में खनन अवशेषों के ‘ओवरबर्डन’ ढेर में दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) के अंश पाए गए हैं जिससे आयात निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

‘ओवरबर्डन डंप’, उस बेकार सामग्री के ढेर को कहते हैं जो मुख्य खनिज तक पहुंचने के लिए हटाई जाती है।

एसईसीएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक हरीश दुहन ने कहा कि अन्वेषण के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अगले एक वर्ष के भीतर इन ढेर का वैज्ञानिक आकलन कर व्यवहार्य स्थलों की पहचान करने की योजना है।

दुहन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में हमने दुर्लभ खनिजों के निष्कर्षण के लिए सात खदान अवशेषों के ढेरों (डंप) की पहचान की है। हमने निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है और एक वर्ष के भीतर हम यह पहचान कर लेंगे कि दुर्लभ खनिज मौजूद हैं। ’’

उन्होंने कहा कि कंपनी इन स्थानों पर दुर्लभ खनिजों की उपस्थिति और आर्थिक व्यवहार्यता का निर्धारण करने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन करेगी। इसमें कोयला खनन के दौरान आमतौर पर फेंके जाने वाले ‘ओवरबर्डन’ सामग्री पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा एवं रक्षा जैसे उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण दुर्लभ खनिज, चीन के प्रभुत्व वाली वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला संबंधी चिंताओं के बीच भारत के लिए एक रणनीतिक प्राथमिकता बन गए हैं।

ऐसे क्षेत्रों की पहचान छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में एसईसीएल के परिचालन क्षेत्रों में केंद्रित है, जहां अन्वेषण में उन्नत भू-भौतिकीय एवं भू-रासायनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

दुहन ने विश्वास जताया कि एक वर्ष के भीतर एसईसीएल सबसे संभावित स्थलों को अंतिम रूप दे देगा, जिससे शुरुआती निष्कर्षण परियोजनाओं एवं संभावित वाणिज्यिक संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा।

चीन से वैश्विक आपूर्ति जोखिमों के मद्देनजर, भारत इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा एवं इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से अपनी दुर्लभ खनिज रणनीति को आक्रामक रूप से आगे बढ़ा रहा है। (भाषा)


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