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गिग वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर अजय ने मंत्री देवांगन को घेरा, मंत्री ने कहा- नियम नहीं बना सके हैं
25-Feb-2026 12:05 PM
गिग वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर अजय ने मंत्री देवांगन को घेरा, मंत्री ने कहा- नियम नहीं बना सके हैं

रायपुर, 25 फरवरी। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने गिग वर्कर्स और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के शोषण और उनकी सामाजिक सुरक्षा को लेकर राज्य में नियम न होने पर श्रम उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन को घेरा। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने नियम नहीं बनाए हैं और केंद्रीय नियमों का पालन किया जाएगा जो बनाए जा रहे हैं।

 बजट सत्र के तीसरे दिन बुधवार को प्रश्न काल में चंद्राकर ने यह मामला उठाया। अजय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में इन कर्मचारियों के लिए कोई नियम नहीं है और वे सभी शोषण का शिकार हो रहे हैं। कंपनियां ऐश कर रही हैं। 

यहां तक कि छत्तीसगढ़ में कितनी आउटसोर्स कंपनियां हैं यह भी सरकार को नहीं मालूम है। गिग वर्कर्स के लिए अधिनियम को अधिसूचित कर दें तो छत्तीसगढ़ के युवाओं को मदद मिलेगी। इन कंपनियों के दस मिनट  के डिलीवरी टाइम जैसी बाध्यता के चलते कई युवा दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। क‌ई जेल में हैं।

अजय ने पूछा कि गिग वर्कर्स संगठित श्रेणी में हैं या असंगठित में? मंत्री देवांगन ने कहा कि निश्चित तौर पर यह चिंता जनक प्रश्न है और गिग वर्कर्स अभी दोनों श्रेणियों में नहीं है।इस पर अजय ने कहा कि लिखित उत्तर में केंद्रीय अधिनियम 2020 का उल्लेख किया है। क्या उसका अनुकूलन करके छत्तीसगढ़ में नियम बनाएंगे। मंत्री देवांगन ने कहा कि हमने नियम बनाने अधिकारियों की कमेटी बनाई थी। इसी बीच केंद्र ने 4 न‌ए श्रम कानूनों को प्रभावशील कर दिया तो नियम नहीं बना पाए। श्री चंद्राकर ने कहा कि यह 4 कानून समवर्ती सूची के हैं राज्य भी अपने नियम बना सकते हैं। और केंद्र ने कहा कि नियम बनते तक श्रम न्यायालय को सुनवाई का अधिकार दिया गया है। उन्होंने कहा कि देश के क‌ई राज्यों ने नियम बना लिए हैं उनका अध्ययन कर क्या यहां बनाएंगे? मंत्री देवांगन ने कहा कि हम केंद्रीय नियमों का अनुशरण करेंगे। और उनके अनुरूप छत्तीसगढ़ के संदर्भ में नियम बनाएंगे। अजय ने इस जवाब पर असहमति जताते हुए कहा कि जब तक पृथक से नियम नहीं बनाएंगे छत्तीसगढ़ के ऐसे वर्कर युवा शोषित होते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वे दो साल से पहले आउटसोर्सिंग और अब गिग वर्कर्स पर प्रश्न लगा रहा हूं। शोषण से बचाने नियम बना लें। राज्य अपने नियम बना सकता है। आपके अफसरों की विशेषज्ञता सभी जानते हैं वे क्या कैसे नियम बनाएंगे। इस कार्य के लिए विधि सचिव, रिटायर्ड जज या हम विशेषज्ञों उपलब्ध करा देंगे। इच्छा शक्ति दिखाएं। मंत्री देवांगन ने कहा कि अभी किसी भी राज्य ने अपने नियम नहीं बनाए हैं।भारत सरकार में नियम बनाने की कार्रवाई यह प्रक्रियाधीन है। उनके आते ही पालन करेंगे।


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