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सुनामी बाद अंडमान के पर्यटन में आई तेजी मगर सडक़, बिजली, पानी के बुनियादी ढांचे की कमी, अत्यधिक लागत अभी भी रोड़े
अंडमान द्वीप से लौटकर पी श्रीनिवास राव
रायपुर, 23 फरवरी (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता )। बंगाल की खाड़ी में 8,249 वर्ग किलोमीटर में फैले 836 द्वीपों में स्थित अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है, लेकिन द्वीपसमूह का बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और ऊर्जा प्रणाली विकास की गति से पीछे चल रही है, जिससे भारत के सामरिक रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र शासित प्रदेशों में से एक अंडमान में संरचनात्मक कमियां खुली आंखों से दिख जाती हैं। कम से कम आबादी वाले आधा दर्जन आयलैंड में तो सडक़ पानी बिजली की समस्या शेष देश की तरह जर्जर ही है।
सालाना लगभग 7 लाख पर्यटक की आवाजाही है। यही यहां कि अर्थव्यवस्था के आधार हैं और जो यहां बसी 4 लाख की आबादी से लगभग दोगुना है?।
अंडमान ट्रंक रोड (एन एच 4) दक्षिण, मध्य और उत्तरी अंडमान को जोडऩे वाली प्रमुख सडक़ बनी हुई है। जो बाराटांग से 250 किमी दूर डिगलीपुर को सीधे जोड़ती है। यह सडक़ दो हिस्सों में बंटी है- बाराटांग से कदमतला और कदमतला से मायाबंदर। उसके बाद डिगलीपुर। यह 184 किमी का सफर तो गड्ढों में सडक़ की तरह रहा। इसी के बीच बना आजाद हिंद सेतु (पुल) 2022 से कदमतला और बाराटांग की जीवनरेखा है।
हालांकि यह चालू है, लेकिन इसके कई हिस्से संकरे हैं और मानसून से क्षतिग्रस्त होने की आशंका रहती है। जिला केंद्रों से आगे, आंतरिक सभी छोटी बड़ी सडक़ें खराब हैं और श्रीविजयपुरम के बाहर बस सेवाएं काफी कम हो जाती हैं। हमने जिस बस में यह सफर किया उसके ड्राइवर का कहना था कि वह बीते 15 वर्ष से इन द्वीपों में बस चला रहा है सडक़ों की हालत वैसी ही है। बनती हैं और अगली ही बारिश में गड्ढों में तब्दील हो जाती है।
इस वजह से अंडमान से रंगत,लांग आयलैंड, हैवलॉक द्वीपों के बीच आवागमन काफी हद तक नौकाओं, क्रूज़ ,फेरी पर निर्भर करता है, जो विशाल जलक्षेत्र में फैले इस क्षेत्र में जीवन रेखा का काम करती हैं।
फीनिक्स खाड़ी में एक नौका संचालक ने कहा कि पर्यटक अक्सर यात्रा संबंधी अपेक्षाओं को गलत समझ लेते हैं। उन्होंने कहा, स्थानीय लोग तो इसके आदी हैं, लेकिन पर्यटक हर जगह हवाई अड्डे जैसी कनेक्टिविटी की उम्मीद करते हैं।
मध्य और उत्तरी अंडमान के कुछ हिस्सों में मोबाइल कनेक्टिविटी अभी भी अस्थिर बनी हुई है। समुद्र के भीतर पनडुब्बी ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी से समग्र बैंडविड्थ में सुधार होने के बावजूद, अंतिम-मील नेटवर्क की विफलता डिजिटल भुगतान और लेनदेन को बाधित करती है। रंगत में एक सरकारी कर्मचारी ने कहा, जब सिग्नल चले जाते हैं, तो सामान्य लेनदेन भी मुश्किल हो जाते हैं। आगंतुकों के लिए, इससे निराशा होती है।
स्थानीय प्रतिनिधियों ने इन संरचनात्मक आर्थिक कमजोरियों की ओर इशारा किया। निम्बुताला निर्वाचन क्षेत्र से जिला परिषद सदस्य आर. माधवन ने कहा कि द्वीप मुख्य भूमि यानी पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना से आपूर्ति पर अत्यधिक निर्भर हैं। उन्होंने कहा, लगभग 90 प्रतिशत आवश्यक वस्तुएं पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और ओडिशा जैसे मुख्य भूमि राज्यों से आयात की जाती हैं। माल ढुलाई लागत और रसद संबंधी देरी के कारण सब्जियों और फलों की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं। सडक़ें अविकसित हैं और संपर्क की कमी बनी हुई है। पर्यटन यहां की रीढ़ है, लेकिन विकास कुछ ही स्थानों तक सीमित है।
माल ढुलाई में व्यवधान के कारण आंतरिक बाजारों में सब्जियों की कीमतें अक्सर 100 रुपये प्रति किलो से अधिक हो जाती हैं। श्री विजयपुरम के बाहर ताजे दूध की उपलब्धता कम हो जाती है, जिससे दूध पाउडर पर निर्भरता बढ़ जाती है। द्वीपों में मुर्गी पालन की आपूर्ति भी असमान बनी हुई है।
बिजली उत्पादन अभी भी काफी हद तक डीजल आधारित संयंत्रों पर निर्भर है, नवीकरणीय ऊर्जा की खपत में हिस्सेदारी बहुत कम है। एनएलसीआईएल सौर ऊर्जा संयंत्र के परियोजना प्रमुख एस. पांडियाराजन ने बताया कि यह संयंत्र दिन के समय 30 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करता है। उन्होंने बताया, द्वीपों की दैनिक आवश्यकता में हमारी हिस्सेदारी लगभग 5 प्रतिशत है। हम भविष्य में उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, लेकिन अभी नहीं। उन्होंने आगे कहा, नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता अभी भी अपर्याप्त है; स्थिरता के लिए मुख्य भूमि ग्रिड के साथ एकीकरण पर विचार किया जा सकता है।
वैज्ञानिक पर्यटन के अलावा अन्य क्षेत्रों में विविधता लाने पर जोर दे रहे हैं। आईसीएआर-सेंट्रल आइलैंड एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक करुणाकरण ने कहा, द्वीप स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल नारियल और केले की अनूठी किस्में पैदा कर सकते हैं। इस दिशा में शोध कार्य जारी है।
तिरुचेंदूर से आए हनीमून कपल प्रीति और प्रदीप ने अपने अनुभव को बेबाकी से बयां किया। प्रीति ने कहा, मेरे पास पासपोर्ट नहीं है, इसलिए मैंने अपने पति से हनीमून के लिए अंडमान को चुनने का आग्रह किया। यहां तीन-चार दिन बिताना बेहद खास रहा। शांत पानी, साफ-सुथरे समुद्र तट और घने जंगलों ने हमारे रिश्ते को और भी मजबूत बना दिया है।
द्वीपों में साक्षरता दर 86 प्रतिशत से अधिक है और प्रति व्यक्ति आय लगभग 2.75 लाख रुपये है। सरकारी रोजगार निवासियों के एक महत्वपूर्ण वर्ग को आर्थिक स्थिरता प्रदान करता है। हालांकि, हितधारकों का तर्क है कि सडक़ नेटवर्क, विविध उद्योग और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बदलाव शेष भारत के मानकों से 20-25 साल पीछे हैं।





