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अपने ही बैंक कर्मियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार
17-Feb-2026 3:55 PM
अपने ही बैंक कर्मियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार

वेतनवृद्धि प्रकरण, 20 को सुनवाई

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर,17 फरवरी। यह ऐसा प्रकरण है, जिसमें सरकार अपने ही जिला सहकारी बैंक कर्मियों की वेतनवृद्धि के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई है। दिलचस्प बात ये है कि हाईकोर्ट की डबल बैंच ने कर्मचारियों के हक में फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट में सरकार, और बैंक कर्मी आमने-सामने हैं। दोनों ने जवाब दाखिल कर दिया है। प्रकरण पर 20 तारीख को सुनवाई होगी।

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की प ीठ जिला सहकारी बैंक कर्मियों की वेतन वृद्धि प्रकरण पर सुनवाई करेगी।

यह प्रकरण रायपुर, और जगदलपुर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारी-कर्मचारियों की वेतन वृद्धि से जुड़ा है। रायपुर जिला सहकारी बैंक के अधीन 6 जिलों की 73 शाखाएं आती हैं। यहां के अधिकारी-कर्मचारी वेतन वृद्धि की मांग को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं। पहले धरना-प्रदर्शन हुआ, और अब प्रकरण कोर्ट में है। बताया गया कि हर साल बैंक अधिकारी-कर्मचारियों को वेतन वृद्धि मिलती थी लेकिन पिछले पांच साल से वेतन वृद्धि रोक दी गई। कर्मचारियों का आरोप है कि सहकारिता विभाग द्वारा जारी आदेशों के कारण उन्हें देय वेतनवृद्धि एवं महंगाई भत्ते से वंचित रखा गया है, जबकि बैंक लगातार लाभ में है।

बताया गया कि सहकारिता पंजीयक ने डॉ. अमलोर पवनाथन कमेटी की सिफारिशों का हवाला देते हुए रायपुर, और जगदलपुर जिला सहकारी बैंकों के लिए पृथक आदेश जारी किए। जबकि अन्य जिला सहकारी बैंकों और छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के लिए अलग आदेश लागू हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जिस बिंदु का उल्लेख कर वेतनवृद्धि रोकी गई है, वह केवल नवीन भर्ती पर लागू होता है, न कि वार्षिक वेतनवृद्धि पर।

बैंक कर्मचारियों का दावा है कि सेवानियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि दंड के अतिरिक्त किसी अन्य कारण से वार्षिक वेतनवृद्धि नहीं रोकी जा सकती। इसके बावजूद विगत पाँच वर्षों से वेतनवृद्धि और वृद्धिशील महंगाई भत्ता नहीं दिया गया। बैंक के संचालक मंडल ने भी इस संबंध में प्रतिबंध शिथिल करने का प्रस्ताव सहकारिता विभाग को भेजा था।

वेतनमान संशोधन संबंधी 6 जनवरी 2020 के आदेश में स्थापना व्यय को सकल आय के 15 प्रतिशत एवं कार्यशील पूंजी के 1.50 प्रतिशत से अधिक होने पर वेतनवृद्धि बाधित होने का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2023-24 और 2024-25 में बैंक उक्त मानकों के भीतर आ चुका है, जिसके बाद भी कर्मचारियों को वेतनवृद्धि नहीं मिल रही है।

 

मामले को लेकर कर्मचारियों ने हाईकोर्ट बिलासपुर में रिट याचिका दायर की थी। न्यायालय ने 24 नवंबर 2023 को 90 दिनों के भीतर प्रकरण के निराकरण का निर्देश दिया था। इसके बाद दायर याचिकाओं पर 19 फरवरी 2025 एवं 6 अगस्त 2025 को पारित आदेशों में रोकी गई वेतनवृद्धियां देने के आदेश दिए गए। कर्मचारियों का आरोप है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद अब तक आदेश का पालन नहीं किया गया है। हाईकोर्ट के आदेश को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। प्रकरण पर 20 तारीख को सुनवाई होगी।

उल्लेखनीय है कि रायपुर का बैंक प्रदेश का सबसे बड़ा सहकारी बैंक है, जिसकी छह राजस्व जिलों में 73 शाखाएं, 550 सहकारी समितियां और 711 धान खरीदी केंद्र संचालित हैं। लगभग सात लाख किसानों से 30 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी कर करीब आठ हजार करोड़ रुपये का भुगतान इसी बैंक के माध्यम से किया जाता है। यह प्रदेश की कुल धान खरीदी का लगभग 35 प्रतिशत है।

बैंक प्रबंधन के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 तक बैंक निरंतर लाभ में रहा है और वर्षांत 2025 में 216 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि वेतनवृद्धि बैंक के स्वीकृत बजट से दी जाती है, जिससे राज्य शासन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। बहरहाल, कोर्ट के फैसले पर निगाहें टिकी हुई है।


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