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निकायों को नियमावली का इंतजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 17 फरवरी। सरकार ने रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) और हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों को नगरीय निकायों को हैंडओवर करने का फैसला तो ले लिया है, लेकिन इन कॉलोनियों पर संभावित भारी वित्तीय भार को देखते हुए निकाय सशर्त हस्तांतरण के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। चर्चा है कि निकायों ने कॉलोनियों के विकास और बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए आवश्यक राशि उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है।
हालांकि रायपुर नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में स्पष्ट किया कि हैंडओवर की प्रक्रिया के लिए अभी तक शासन की ओर से कोई औपचारिक नियमावली जारी नहीं हुई है। नियम तय होने और विस्तृत दिशा-निर्देश मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राज्य शासन ने आरडीए और छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की रायपुर स्थित 9 आवासीय कॉलोनियों को नगर निगम को सौंपने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त प्रदेश के विभिन्न जिलों में हाउसिंग बोर्ड की 35 कॉलोनियों को संबंधित निकायों को हस्तांतरित करने की तैयारी है। शासन स्तर से विस्तृत नियमावली जारी होने के बाद तीनों एजेंसियां संयुक्त सर्वे कर कॉलोनियों की वास्तविक स्थिति का आंकलन करेंगी।
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित सर्वे में पेयजल आपूर्ति तंत्र, सीवरेज नेटवर्क, आंतरिक सड़कों, स्ट्रीट लाइट, उद्यानों और सफाई व्यवस्था की मौजूदा हालत का तकनीकी परीक्षण किया जाएगा। कई कॉलोनियों में 15 से 20 वर्ष पुरानी पाइपलाइन, जर्जर नालियां और क्षतिग्रस्त सड़कें बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। जलापूर्ति की अधिकांश पाइपलाइनें डेढ़ दशक से अधिक पुरानी बताई जा रही हैं, जिनकी उपयोग अवधि लगभग समाप्ति पर है।
निगम के लिए हैंडओवर से पहले वित्तीय भार, अतिरिक्त स्टॉफ की आवश्यकता और रखरखाव की दीर्घकालिक रूपरेखा तय करना अत्यावश्यक माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बिना स्पष्ट वित्तीय प्रावधान और आधारभूत संरचना की स्थिति स्पष्ट हुए कॉलोनियों का सीधा हस्तांतरण निगम के लिए बोझ बन सकता है।
अधिकारी ने दोहराया कि शासन से आदेश और नियमावली प्राप्त होने के बाद ही कॉलोनियों की वास्तविक स्थिति का सर्वे किया जाएगा और उसी आधार पर आगे की कार्यवाही तय होगी। फिलहाल निगम को इस संबंध में कोई औपचारिक निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।


