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गेस्ट टीचर्स लंबे समय तक पढ़ाने के आधार पर पक्की नौकरी का दावा नहीं कर सकते
17-Feb-2026 11:59 AM
गेस्ट टीचर्स लंबे समय तक पढ़ाने के आधार पर पक्की नौकरी का दावा नहीं कर सकते

हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य से कहा- नई भर्ती प्रक्रिया में इनके अनुभव को वरीयता दें 

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 17 फरवरी। एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल में कार्यरत अस्थायी स्नातकोत्तर शिक्षकों को नियमित करने की मांग पर दायर याचिका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। अदालत ने कहा है कि केवल कई साल तक गेस्ट या अस्थायी शिक्षक के रूप में काम करने से स्थायी नौकरी का अधिकार नहीं बनता।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। याचिकाकर्ता सरोज कुमार गुप्ता, अनूप तिर्की और अन्य शिक्षक 2016 से 2022 के बीच पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (पीजीटी) के पद पर गेस्ट फैकल्टी के रूप में नियुक्त हुए थे। कई शिक्षक छह साल से और कुछ चार साल से सेवा दे रहे हैं।

उन्होंने अदालत में कहा कि वे संबंधित विषयों में स्नातकोत्तर और बी.एड. डिग्रीधारी हैं तथा लगातार पढ़ा रहे हैं, इसलिए उन्हें नियमित किया जाए। लेकिन अदालत ने पाया कि उनकी नियुक्ति किसी तय भर्ती नियम या नियमित चयन प्रक्रिया के तहत नहीं हुई थी। इसलिए उन्हें स्थायी नियुक्ति का कानूनी अधिकार नहीं मिलता।

सुनवाई के दौरान 13 नवंबर 2020 को जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का हवाला दिया गया। इन गाइडलाइन में कहा गया है कि शिक्षकों की भर्ती तय नियमों और आरक्षण नीति के अनुसार होगी। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन जारी कर चयन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। दिशा-निर्देशों में पहले से कार्यरत पीजीटी शिक्षकों को स्वतः नियमित करने का कोई प्रावधान नहीं है।

हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन्होंने लंबे समय तक संस्थान में पढ़ाया है, उनके अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि भविष्य की भर्ती या पुनर्नियुक्ति में इन शिक्षकों के अनुभव को उचित वरीयता दी जाए, बशर्ते वे पात्रता की अन्य शर्तें पूरी करते हों।


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