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दिल्ली यूनिवर्सिटी में यूजीसी के समर्थन में निकाली गई रैली कवर करने पहुंचीं महिला यूट्यूबर रुचि तिवारी और अन्य स्टूडेंट्स के साथ मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की है.
दिल्ली के मौरिस नगर थाने ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया है कि इस मामले में रुचि तिवारी की शिकायत पर एफ़आईआर दर्ज की गई है.
पुलिस ने बताया है कि इस मामले में शामिल अभियुक्तों की पहचान घटना के वीडियो के आधार पर की जाएगी.
इस मारपीट के वीडियो को सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किया और रुचि तिवारी के पक्ष और विपक्ष में कमेंट किए गए हैं. वीडियो में रुचि तिवारी और कुछ स्टूडेंट्स के बीच बहस और धक्का-मुक्की को देखा जा सकता है.
इस मामले में सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने रुचि तिवारी पर लोगों को भड़काने का आरोप भी लगाया है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ शुक्रवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट संगठन एआईएसए (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) का प्रदर्शन चल रहा था.
एएनआई से बातचीत में रुचि तिवारी ने कहा, “मेरी वीडियो हर किसी के पास पहुंच गई है. लोग ख़ुद देखकर फ़ैसला करेंगे कि मैंने कितना भड़काया और कितनी भीड़ मेरे ऊपर आकर टूटी. ”
उन्होंने कहा, “मैं वहां कुछ नहीं कर पा रही थी. मुझे ग़लत तरीके से टच किया जा रहा था. मेरा गला पकड़ा गया था. मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए गए थे. पुलिस वहां खड़े होकर देख रही थी.”
रुचि तिवारी ने आरोप लगाया है कि उनकी जाति देखकर उनके साथ मारपीट की गई.
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने जारी किया बयान
इस घटना के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर योगेश सिंह ने एक बयान जारी कर शिक्षकों और विद्यार्थियों से आपस में मिलकर रहने की अपील की है.
इस बयान में कहा गया है, “मैं दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों से अनुरोध करता हूं कि वह आपस में सौहार्द बनाए रखें. कोई भी ऐसा काम न करें जिससे आपसी मनमुटाव बढ़े और राष्ट्र व विश्वविद्यालय की छवि को नुक़सान हो. दिल्ली विश्वविद्यालय में कल जो घटना हुई वह चिंता का विषय है.”
बयान में आगे कहा गया, “विश्वविद्यालय में भारत के सभी प्रदेशों और सभी समुदायों के विद्यार्थी पढ़ते हैं. सामाजिक सौहार्द सबसे बड़ी चीज़ है; और उसे बनाए रखना हम सब का कर्तव्य है."
"मैंने आज कई विद्यार्थी समूहों और शिक्षक समूहों से बातचीत की है और पुलिस प्रशासन से भी बात करके ये सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में कोई ऐसी घटना न हो जिससे सद्भाव को कोई नुकसान पहुंचे. यूजीसी के जो नए नियम आए हैं, वह अभी माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं."
उन्होंने कहा, “मैं विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों से अपील करता हूं कि वह भारत सरकार पर अपना भरोसा बनाए रखें और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का इंतज़ार करें.” (bbc.com/hindi)


