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कोलकाता, 12 फरवरी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए चरणों की संख्या केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की उपलब्धता के आधार पर तय की जाएगी। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पिवार को यह बात कही।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी का कार्यालय एक ही चरण में चुनाव कराने के पक्ष में है और उसने यह प्रस्ताव निर्वाचन आयोग को भेज दिया है। अधिकारी ने बताया कि इस मामले पर अंतिम निर्णय लेने के लिए नयी दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग मुख्यालय में गहन विचार-विमर्श जारी है।
अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में मतदान के चरणों की संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि केंद्रीय बलों की कितनी कंपनियां उपलब्ध कराई जा सकती हैं।’’
उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग के अधिकारी बलों की आवश्यकता और उपलब्धता का आकलन कर रहे हैं।
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में राज्य में केंद्रीय बलों की लगभग 1,100 कंपनियां तैनात की गई थीं।
अधिकारी ने बताया कि आयोग ने राज्य प्रशासन को संवेदनशील मतदान केंद्रों और संवेदनशील क्षेत्रों की तत्काल पहचान करने का निर्देश दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों से संवेदनशील बूथों और क्षेत्रों की पहचान करने के लिए कहा है। इससे संबंधित सूची के प्राप्त होने के बाद ही चरणों की संख्या पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।’’
अधिकारी ने बताया कि पूरी प्रक्रिया संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथों की संख्या पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है, लेकिन अशांति को रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त कर्मियों की आवश्यकता है।
सूत्रों ने दावा किया कि हालांकि संवेदनशील बूथों की पहचान का काम आमतौर पर विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले शुरू हो जाता है और सेक्टर अधिकारियों की नियुक्ति लगभग चार महीने पहले कर दी जाती है, लेकिन इस वर्ष विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण यह प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं हो सकी।
सूत्रों ने बताया कि अब एसआईआर प्रक्रिया के लगभग पूरी हो जाने पर निर्वाचन आयोग ने पूर्ण पैमाने पर चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
प्रारंभिक चर्चाओं के अनुसार, आयोग तीन चरणों में चुनाव कराने पर विचार कर रहा है। प्रथम चरण के तहत उत्तर बंगाल में और दो अन्य चरण के तहत दक्षिण बंगाल में चुनाव कराने पर विचार किया जा रहा है।
अधिकारी के अनुसार, चुनावी हिंसा की पिछली घटनाओं को देखते हुए सात जिलों पर नजर रखी जा रही है। ये जिले उत्तर बंगाल के कूच बिहार और उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण बंगाल के दोनों 24 परगना, मालदा, मुर्शिदाबाद और बीरभूम हैं। (भाषा)


