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अर्थव्यवस्था को कमजोर बताने वाले लोग देश की उपलब्धियों का मजाक बना रहे हैं : वित्त मंत्री
12-Feb-2026 8:10 PM
अर्थव्यवस्था को कमजोर बताने वाले लोग देश की उपलब्धियों का मजाक बना रहे हैं : वित्त मंत्री

नयी दिल्ली, 12 दिसंबर। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि वैश्विक स्थिति के विपरीत भारत में जीडीपी विकास दर अधिक और मुद्रास्फीति कम है जो एक दुर्लभ स्थिति है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर बताने वाले दरअसल देश के उन सभी लोगों का मजाक बना रहे हैं जिनके कारण यह उपलब्धि हासिल हो पायी है।

उच्च सदन में आम बजट 2026-27 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट ऐसे ऐतिहासिक समय में पेश किया जा रहा है जब देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की ऊंची दर है और मुद्रास्फीति की दर कम है जो दुर्लभ बात है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति कोई तुक्का नहीं है बल्कि यह समय पर लिए गए विस्तृत निर्णय एवं कदमों तथा सतत विकास का परिणाम है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह एक दुर्लभ क्षण है जिसने हमें अगले दो दशक, 2047 तक के लिए योजना बनाने का अवसर दिया है...हमारा लक्ष्य विकसित भारत है।’’ इसी पृष्ठभूमि में बजट तैयार किया गया है।

सीतारमण ने कहा कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अग्रिम अनुमानों के अनुसार 2025-26 की वास्तविक जीडीपी विकास दर 7.4 प्रतिशत बतायी गयी है तथा सामान्य विकास दर करीब आठ प्रतिशत होगी। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक घटकर करीब दो प्रतिशत रह गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि वह जिस स्थिति की बात कर रही है उसमें ऊंची विकास दर, दामों में स्थिरता है जो वैश्विक स्तर पर कम देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारभूत स्थिति को परिलक्षित करती है।

सीतारमण ने कहा कि वह इस बात को दोहराना चाहती हैं कि यह उपलब्धि भारत के लोगों की उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को मृत अर्थव्यवस्था बताने वाले और इसकी आलोचना करने वाले लोग दरअसल यह कहकर भारत के उन लोगों की उपलब्धि का मजाक बना रहे हैं जो अपने-अपने स्तर पर इसके विकास में योगदान दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 2026-27 का बजट इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि इन उपलब्धियों का लाभ उठाया जा सके, इन सूक्ष्म आर्थिक स्थिरता कारकों को दीर्घकालिक उत्पादक क्षमताओं में परिवर्तित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस विकास गति को अगले दशकों तक विस्तार दिया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि इन सबमें आत्मनिर्भरता एक महत्वपूर्ण सिद्धान्त है तथा सरकार ने बजट में जो भी घोषणाएं कीं और नीतियां बनायी हैं, उसमें आत्मनिर्भरता का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने घरेलू उत्पादन क्षमता का निर्माण किया है... बजट का निर्माण करते समय हमने ऊर्जा सुरक्षा को भी अपने ध्यान में रखा है।’’

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि भारत के लोग भी अपने-अपने क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि इसके लिए जीवनयापन की सरलता, रोजगार सृजन में सहयोग, कृषि उत्पादकता में वृद्धि, परिवारों की क्रय शक्ति को बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि वो जमाना चला गया जब दिल्ली से एक रूपया चलता था तो लोगों के पास पंद्रह पैसा पहुंचता था, अब एक-एक पैसा लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कि 2014 के बाद से लाभार्थियों के पास प्रत्यक्ष नकदी अंतरण के माध्यम से 48 लाख करोड़ रूपये पहुंचाया जा चुका है तथा इसके माध्यम से 4.31 लाख करोड़ रूपये गलत हाथों में जाने से बचाया गया है।

बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष द्वारा इस बजट में पुरानी बातों और घोषणाओं को भुला दिये जाने के आरोप का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि विगत को कभी नहीं भुलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उज्ज्वल विगत है तो उसकी सदैव सराहना की जानी चाहिए किंतु यदि वह दागदार हो तो उसकी नकल नहीं की जानी चाहिए।

सीतारमण ने कहा कि इस बजट में दहाई अंकों की मुद्रास्फीति, ‘पांच कमजोर अर्थव्यवस्था’, फोन कॉल पर बैंकों से कर्ज देने के लिए कहा जाने, ऊंचे घाटे, घटते अवसर आदि पूर्व सरकार के शासनकाल की बातों को याद रखा गया है। उन्होंने कहा कि पहले नारा हुआ करता था, ‘‘रोजगार विहीन विकास।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसे कभी नहीं भूलती हूं किंतु उससे सीखती हूं।’’

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि उच्च आयकर संग्रह का यह अर्थ नहीं है कि देश में मध्यम वर्ग का दमन हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश में मध्यम वर्ग के दमन का कोई सबूत नहीं है, बल्कि मध्यम वर्ग के विस्तार के सबूत जरूर हैं।

उन्होंने कहा, "उच्च व्यक्तिगत आयकर संग्रह का यह अर्थ नहीं है कि देश में मध्यम वर्ग का दमन हो रहा है।"

उन्होंने कई कल्याणकारी योजनाओं में व्यय कटौती के विपक्ष के आरोपों का भी खंडन किया और कहा कि किसी भी योजना के लिए राज्यों को धन की आपूर्ति में कोई कमी या रोक नहीं है।

सरकारी योजनाओं पर हुए खर्च की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में सामाजिक क्षेत्र की 14 योजनाओं में केवल 37,000 करोड़ रुपये ही बिना खर्च किए रह गए, जबकि संप्रग सरकार के दौरान यह आंकड़ा 94,000 करोड़ रुपये था।

सीतारमण ने आवंटन के बिना योजनाओं की घोषणा करने के विपक्ष के आरोपों को भी खारिज करते हुए पिछली संप्रग सरकार के दौरान के कई उदाहरण दिए।

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस बढ़ते कर्ज पर मगरमच्छ के आंसू बहाती है, हालांकि यह सरकार अत्यधिक कर्ज नहीं लेती।

वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र का कोष कोई मुफ्त भंडार नहीं है जिसे इस्तेमाल किया जा सके; यह नागरिकों की मेहनत की कमाई है।

वित्त मंत्री सीतारमण ने एक फरवरी को लोकसभा में बजट पेश किया था। राज्यसभा में नौ फरवरी से बजट पर चर्चा शुरू हुई थी। (भाषा)


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