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कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसा मामले में तंबाकू कारोबारी के बेटे को अदालत से जमानत मिली
12-Feb-2026 8:05 PM
कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसा मामले में तंबाकू कारोबारी के बेटे को अदालत से जमानत मिली

कानपुर (उप्र), 12 फरवरी। कानपुर की एक अदालत ने ‘हाई-प्रोफाइल’ लैंबॉर्गिनी दुर्घटना मामले में आरोपी शिवम मिश्रा को बृहस्पतिवार को जमानत दे दी। इस मामले से जुड़े एक अधिवक्ता ने यह जानकारी दी।

पुलिस ने इस सप्ताह के आरंभ में यहां वीआईपी रोड पर हुई ‘हाई-प्रोफाइल’ लैंबॉर्गिनी दुर्घटना के मामले में स्थानीय तंबाकू कारोबारी के. के. मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को बृहस्पतिवार को ही गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था। इस हादसे में कई लोग घायल हो गए थे।

जिला शासकीय अधिवक्‍ता (अपराध) दिलीप अवस्थी ने कहा कि शिवम को 20,000 रुपये का जमानत बॉन्ड भरने के बाद रिहा कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने पूछताछ के लिए शिवम को हिरासत में देने का अनुरोध किया था, लेकिन अदालत ने हिरासत की जरूरत पर सवाल उठाया।

आरोपी के अधिवक्‍ता अनंत शर्मा ने बताया कि पुलिस ने उसकी 14 दिन की हिरासत मांगी थी, लेकिन अदालत ने इसकी इजाजत नहीं दी और इसके बजाय उसे 20,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी।

शर्मा ने कहा कि पुलिस ने मिश्रा को हिरासत में लेने के लिए अदालत में अर्जी दी थी, लेकिन उसमें कई गड़बड़ियां थीं।

उन्होंने दावा किया कि कागजातों में ‘नोटिस सर्विस’ के बारे में विवरण नहीं था, जिसके बाद अदालत ने पुलिस की अर्जी खारिज कर दी और आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

शर्मा ने कहा कि कानपुर पुलिस ने सुबह मिश्रा को आधिकारिक रूप से गिरफ्तार किया था और सुबह करीब 10 बजे स्थानीय अदालत में पेश किया।

उन्होंने कहा कि दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया और दोपहर तीन बजे के बाद सुनाया।

आदेश को “सही और उचित” बताते हुए, शर्मा ने कहा कि इस स्तर पर सजा या जुर्माना लगाने का कोई प्रावधान नहीं है और मिश्रा को जमानत बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया।

एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर दावा किया कि आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए एम्बुलेंस में घूम रहा था।

उन्होंने कहा कि मेडिकल जांच के बाद, उसे अदालत में पेश किया गया, सुनवाई के दौरान वह थोड़ा बीमार लग रहा था।

उन्होंने कहा कि शिवम ने अदालत कक्ष के बाहर मीडिया वालों के वीडियो रिकॉर्ड करने पर भी एतराज़ जताया।

बचाव पक्ष के एक और वकील नरेंद्र यादव ने बताया कि जांच अधिकारी हिरासत में लेने के लिए ठोस आधार पेश करने में नाकाम रहा, जिसके बाद न्यायाधीश ने पुलिस की अर्जी खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि अदालत ने प्रक्रियागत खामियों को लेकर जांच अधिकारी की भी खिंचाई की।

उन्होंने कहा कि अदालत में शिवम ने भरोसा दिलाया कि वह जांच में सहयोग करेगा और न तो गवाहों को धमकाएगा और न ही सबूतों से छेड़छाड़ करेगा।

मिश्रा की तरफ से पेश हुए बचाव पक्ष के वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता नरेश चंद्र त्रिपाठी ने पत्रकारों को बताया कि यह गिरफ्तारी उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देश और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधान का उल्लंघन है।

त्रिपाठी ने कहा कि अदालत ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए और उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देश और बीएनएसएस प्रावधान को ध्यान में रखते हुए, उनके मुवक्किल को पुलिस हिरासत में भेजने से मना कर दिया तथा उसे 20,000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने सरकारी दबाव में काम किया ।

रिहाई के बाद, शिवम मिश्रा अपने वकीलों द्वारा दी गई कड़ी सुरक्षा के बीच भीड़भाड़ वाले अदालत परिसर से बाहर निकला।

कानपुर के पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से दिन में कहा था, ‘‘आरोपी शिवम मिश्रा (35) को गिरफ्तार कर लिया गया है।’’ (भाषा)


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