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दिल्ली उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय आरटीआई आवेदन खारिज करने के मामले में शीर्ष पर: सीआईसी
12-Feb-2026 8:04 PM
दिल्ली उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय आरटीआई आवेदन खारिज करने के मामले में शीर्ष पर: सीआईसी

नयी दिल्ली, 12 फरवरी। दिल्ली उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय उन प्रमुख सार्वजनिक प्राधिकरणों में शामिल हैं जिन्होंने वर्ष 2024-25 के दौरान सूचना के अधिकार(आरटीआई) के तहत दाखिल आवेदनों को सबसे अधिक खारिज किया। यह खुलासा केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट में हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक वित्त मंत्रालय में भी इस अवधि में बड़े पैमाने पर यह परिपाटी देखी गई।

सीआईसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) की धारा 8(1) राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य संरक्षित हितों जैसे मामलों में सूचना के प्रकटीकरण से छूट प्रदान करती है। उसने बताया कि इस धारा का 28,924 बार इस्तेमाल किया गया। यह अस्वीकृति के सभी आधारों का लगभग आधा, यानी 49.88 प्रतिशत था।

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2024-25 के दौरान प्राप्त 2,089 आरटीआई आवेदनों में से 22.88 प्रतिशत को खारिज कर दिया। यह शीर्ष 20 मंत्रालयों, विभागों और स्वतंत्र सार्वजनिक प्राधिकरणों में सबसे अधिक अस्वीकृति दर है।

उच्चतम न्यायालय ने आरटीआई के तहत प्राप्त आवेदनों में से 13.73 प्रतिशत को खारिज कर दिया और उसका इस मामले में दूसरा स्थान रहा। शीर्ष अदालत ने इस अवधि में प्राप्त 5,017 आवेदनों में से 689 आवेदनों को अस्वीकार किया।

सीआईसी रिपोर्ट के मुताबिक गृह मंत्रालय ने आरटीआई के तहत प्राप्त 58,130 आवेदनों में से 7,750 आवेदनों को खारिज कर दिया। इस प्रकार उसने आरटीआई के तहत प्राप्त कुल आवेदनों में से 13.33 प्रतिशत का जवाब देने से इनकार कर दिया और यह प्रमुख मंत्रालयों में सबसे अधिक है।

आंकड़ो के मुताबिक वित्त मंत्रालय को सबसे अधिक 2,20,283 आवेदन प्राप्त हुए जिनमें से उसने 18,734 आवेदनों को अस्वीकार कर दिया, जो कि 8.50 प्रतिशत के बराबर है।

विधि एवं न्याय मंत्रालय ने 7.14 प्रतिशत (18,638 आवेदनों में से 1,330) आवेदनों को अस्वीकार किया जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 10,134 आवेदनों में से 7.98 प्रतिशत मामलों में जवाब देने से इनकार किया।

सीआईसी के मुताबिक इसके विपरीत, कुछ ऐसे विभाग भी रहे जहां आवेदनों की संख्या अधिक होने के बावजूद निम्न अस्वीकृति दर दर्ज की गई।

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय को आरटीआई आवेदनों की सबसे अधिक संख्या (2,54,657) प्राप्त हुई, लेकिन उसने केवल 351 आवेदनों को अस्वीकार किया, जो मात्र 0.14 प्रतिशत है। (भाषा)


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