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MOZIZ IMAM
-मौज़िज़ इमाम
उत्तर प्रदेश के कानपुर में बीते रविवार को एक करोड़पति व्यवसायी की कार ने कई लोगों को टक्कर मार दी थी.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गाड़ी तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा चला रहे थे.
लेकिन दुर्घटना के दो दिन बाद बुधवार को शिवम मिश्रा के ड्राइवर ने पुलिस के सामने दावा किया कि गाड़ी वह चला रहे थे.
इस हाई-प्रोफ़ाइल मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं और दुर्घटना के बाद शिवम मिश्रा को छोड़ देने के मामले में थाना प्रभारी को निलंबित भी कर दिया गया है.
इस बीच, समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अभियुक्त शिवम मिश्रा को गुरुवार को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
इधर तेज़ी से बदलते घटनाक्रम में बुधवार को ही पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने वाले व्यक्ति ने समझौता होने का दावा करते हुए अदालत में समझौता पत्र दाखिल कर दिया.
क्या है मामला?
रविवार 8 फ़रवरी को कानपुर के ग्वाल टोली थाना क्षेत्र के वीआईपी रोड पर रेव के पास दोपहर करीब 3:15 बजे एक लेम्बोर्गिनी कार ने तीन से ज़्यादा लोगों को टक्कर मार दी थी.
घटनास्थल पर मौजूद होने का दावा कर रहे कुछ लोगों का कहना था कि शिवम मिश्रा अपनी कार को तेज़ गति से चला रहे थे. कार अचानक बेकाबू हो गई और सड़क किनारे खड़े वाहनों तथा पैदल चल रहे लोगों से टकरा गई.
उनका ये भी दावा था कि कार की रफ़्तार इतनी तेज़ थी कि लेम्बोर्गिनी का अगला पहिया बुलेट के ऊपर चढ़ गया था, जिससे बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई.
प्रत्यक्षदर्शी होने का दावा करने वाले लोगों का कहना था कि इस हादसे के तुरंत बाद गुस्साई भीड़ ने लेम्बोर्गिनी को घेर लिया था. कार में बैठे शिवम मिश्रा डर के मारे अंदर ही दुबक गए थे. ऐसे भी वीडियो सामने आए जिनमें दिख रहा है कि उनके (शिवम मिश्रा के) साथ मौजूद बाउंसरों ने भीड़ को भगाने की कोशिश की.
इसी बीच पुलिस मौके पर पहुंची और शिवम मिश्रा और कार को ग्वाल टोली थाने ले आई. घायलों को भी पुलिस की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया.
एक पीड़ित सोनू त्रिपाठी कहा, "मैं अपने रिश्तेदार विशाल त्रिपाठी की बुलेट पर सवार होकर सड़क किनारे एक दुकान पर खड़ा था. वह टी-शर्ट देख रहे थे तभी लैंबोर्गिनी ने पहले एक ऑटो को टक्कर मारी और फिर उनकी बुलेट को कुचल दिया. विशाल हवा में उछलकर गिरा, जबकि अन्य दो युवकों को भी ज़ोरदार चोटें आईं."
पुलिस ने दावा किया है कि इस दुर्घटना में किसी की मौत नहीं हुई है और एक ही व्यक्ति घायल हुआ है.
प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के बाद भी पुलिस ने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ बीएनएस की धारा 281,125 (a) 125 ( b) 324 (4) में लापरवाही से गाड़ी चलाने का मामला दर्ज किया था. पुलिस ने शिवम मिश्रा को थाने ले जाकर छोड़ दिया था.
इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने के बाद स्थानीय थाना प्रभारी संतोष गौर को लापरवाही के आरोप में हटा दिया गया है.
हालांकि कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने मीडिया से कहा, "इस घटना के बाद वहां पर मौजूद लोगों से और सुबूतों से पता चलता है कि शिवम मिश्रा ही गाड़ी चला रहे थे. एफ़आईआर में नाम इसलिए नहीं लिखा गया क्योंकि जो घायल तौफ़ीक़ थे उनको कार चालक का नाम नहीं पता था."
गाड़ी कौन चला रहा था
इस केस में नया मोड़ तब आ गया जब शिवम मिश्रा के वकीलों ने दावा किया कि इस काले रंग की कार को शिवम मिश्रा नहीं उनके ड्राइवर चला रहे थे.
अदालत में शिवम मिश्रा के वकीलों ने दो एप्लीकेशन दी हैं. एक ड्राइवर मोहन लाल की तरफ से कि वह गाड़ी चला रहे थे. दूसरा गाड़ी को छुड़ाने के लिए प्रार्थना पत्र है.
कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने कहा, "हमारी जांच में पता चला है कि शिवम मिश्रा ही कार चला रहे थे."
शिवम मिश्रा के वकील, मृत्युंजय कुमार ने कानपुर में मीडिया से कहा, "मेरे मुवक्किल गाड़ी नहीं चला रहे थे. बल्कि गाड़ी घर के ड्राइवर चला रहे थे. हम लोग इस संबंध में कोर्ट में सुबूत पेश करेंगे."
कानपुर के डीसीपी (सेंट्रल) अतुल कुमार श्रीवास्तव ने एएनआई से कहा, "हमें जानकारी मिली थी शिवम मिश्रा कानपुर आया है. पांच पुलिस टीमें गठित की गईं थीं और उसे गिरफ़्तार कर कोर्ट में पेश किया गया है."
उन्होंने कहा, "पुलिस की कार्यवाही और विवेचना में ये सामने आया है कि एक्सिडेंट के वक्त शिवम मिश्रा ही कार चला रहे थे. "
पुलिस ने शिवम मिश्रा को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन वो नहीं पहुंचे. उनके पिता केके मिश्रा 10 फ़रवरी को ग्वालटोली थाने पहुँचे, जहां उनका बयान दर्ज किया गया.
स्थानीय मीडिया को दिए गए बयान में केके मिश्रा ने कहा, "इस कार में दो लोग थे, ड्राइवर और शिवम मिश्रा. शिवम मिश्रा कार नहीं चला रहे थे बल्कि उनकी तबीयत बिगड़ने की वजह से ड्राइवर ने उनकी पीठ पर हाथ लगाया, तभी टेंपो कार से आकर लड़ गया. इसके बाद ड्राइवर ने गाड़ी में ब्रेक लगाया."
पुलिस से पूछताछ के नोटिस के संबंध में उन्होंने कहा था, "घटना के बाद उनको घर लाया गया, जहां तबीयत बिगड़ने के कारण दिल्ली में इलाज कराया जा रहा है. वह जब ठीक होंगे तो जांच में सहयोग करेंगे."
ड्राइवर मोहन लाल बुधवार को अदालत में सरेंडर करने आए थे. वहां पर मौजूद मीडिया से बात करते हुए ड्राइवर मोहन ने कहा, "कार मैं चला रहा था, जिस वक्त यह हादसा हुआ शिवम की तबीयत ख़राब हो गई थी. उनको दौरा पड़ गया और वह मेरे ऊपर गिर गए. घबराहट में कार लड़ गई थी."
मोहन ने कहा, "उसके बाद कार का ऑटोमेटिक सिस्टम लॉक हो गया. बाहर निकलने से पहले मैंने शिवम को ड्राइवर सीट पर शिफ़्ट कर दिया था."
हालांकि पुलिस ने इस मामले पर कोर्ट से कहा कि मोहन को अभियुक्त नहीं बनाया गया है. इसके बाद कोर्ट ने सरेंडर को स्वीकार नहीं किया.
इस बीच इस मामले के शिकायतकर्ता तौफीक़ अहमद ने भी कहा कि गाड़ी ड्राइवर मोहन लाल चला रहे थे और उनका मोहन लाल से समझौता हो गया है. इसके लिए कोर्ट में समझौता पत्र भी दाखिल किया गया है.
उन्होंने समझौता पत्र में लिखा, "मेरा प्रतिवादी से समझौता हो गया है. इलाज का ख़र्च दे दिया है. इसलिए आगे कार्रवाई नहीं चाहते हैं."
इस संबंध में शिवम मिश्रा की ओर से पेश वकील नरेंद्र यादव ने कहा, "हमने तौफ़ीक़ अहमद और मोहन लाल का शपथ पत्र दिया है. तौफ़ीक़ अहमद ने कहा है कि गाड़ी मोहन लाल चला रहा था. अब कोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार है."
सरकारी वकील दिलीप अवस्थी ने कहा, "मोहन लाल नाम के व्यक्ति ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था, लेकिन पुलिस रिपोर्ट में वह वांछित नहीं है."
कौन है शिवम मिश्रा
इस मामले में शिवम मिश्रा एक महत्वपूर्ण किरदार हैं, जिन्हें प्रत्यक्षदर्शियों ने गाड़ी चलाते देखा और लोगों के विरोध के बावजूद पुलिस ने उन्हें थाने ले जाकर छोड़ दिया.
तकरीबन 35 साल के शिवम मिश्रा तंबाकू के बड़े कारोबारी केके मिश्रा के बेटे हैं. उनका परिवार कानपुर के आर्य नगर में रहता है. दिल्ली के वंसत विहार इलाके में भी उनका मकान है.
केके मिश्रा बंशीधर एक्सपोर्ट के नाम से फर्म चलाते हैं. उनका तंबाकू का व्यवसाय है. यह कंपनी देश के प्रमुख तंबाकू सप्लाई नेटवर्क में से एक है.
द इकॉनामिक टाइम्स के मुताबिक दो साल पहले 2024 में, शिवम मिश्रा उस वक़्त सुर्खियों में आए थे. जब आयकर विभाग ने कानपुर, दिल्ली, मुंबई और गुजरात में कुल 20 जगहों पर उनके परिवार के कारोबार और रिहायशी ठिकानों में तलाशी अभियान चलाया था.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, शिवम मिश्रा बंशीधर टोबैको प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक हैं. कंपनी के भीतर वह मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन ऑपरेशंस और वित्तीय योजना का प्रबंधन करते हैं और देशभर में समूह की मौजूदगी बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है.
द इकॉनामिक टाइम्स के मुताबिक उनके पास करीब 50 करोड़ रुपये की कारें हैं. आयकर अधिकारियों ने तलाशी के दौरान दिल्ली के वसंत विहार स्थित उनके आवास से कई लग्ज़री वाहन जब्त किए थे. इन कारों में रोल्स-रॉयस फैंटम, मैकलेरन, पोर्श और लेम्बोर्गिनी रेवुएल्टो शामिल हैं. सभी गाड़ियों का एक ख़ास नंबर 4018 था.
2024 में आयकर विभाग ने 4.5 करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे. इसके बाद की तलाशी में कथित तौर पर अतिरिक्त 7 करोड़ रुपये नकद, आभूषण और अन्य कीमती सामान भी ज़ब्त किया गया था.
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, ज़ब्त चीज़ों में शामिल एक हीरे जड़ी घड़ी की कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये आंकी गई थी. (bbc.com/hindi)


