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बस्तर में भय का अंत, विकास का नया सवेरा हो रहा-राष्ट्रपति मुर्मू
07-Feb-2026 2:30 PM
बस्तर में भय का अंत, विकास का नया सवेरा हो रहा-राष्ट्रपति मुर्मू

  बस्तर पंडुम-2026 का आगाज  
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर/रायपुर, 7 फरवरी।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को जगदलपुर में बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने बस्तर की संस्कृति की तारीफ की, और कहा कि बस्तर के लोग जीवन को उत्सव के रूप में जीते हैं। बाकी लोग इससे सीख सकते हैं। उन्होंने नक्सलवाद छोडक़र मुख्य धारा में आने वालों की सराहना की, और कहा कि उन्हें संविधान और लोकतंत्र पर आस्था रखनी चाहिए।  उन्होंने कहा कि बस्तर में भय का अंत हो रहा है और विकास का नया सवेरा हो रहा है।

लालबाग के मैदान में बस्तर पंडुम-2026 के शुभारंभ मौके पर राष्ट्रपति ने जनसमुदाय को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जब भी वो छत्तीसगढ़ आती हैं, ऐसा लगता है कि वो अपने घर आई हैं। यहां अपनापन मिलता है वह अनमोल है। 

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने कहा कि बस्तर की सुंदरता को देखकर ऐसा लगता है कि मां दंतेश्वरी ने खुद अपने हाथों से सजाया है। देश के नक्शे में भले ही बस्तर को पिछड़ा माना जाता है, लेकिन यहां की कला, संस्कृति अनमोल है। उन्होंने बस्तर पंडुम के आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की सराहना की। लोगों को पंडुम महोत्सव देखना चाहिए, और सीखना चाहिए। 

राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर पंडुम में 50 हजार से अधिक लोग जनजाति  संस्कृति की झलक दिखाएंगे। उन्होंने जनजाति संस्कृति से अवगत कराने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर में प्राकृतिक रूप से बहुत सुंदर है। यहां बेहतर सुविधाएं विकसित हो रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल कदम उठा रही है। 
राष्ट्रपति ने नक्सलवाद का जिक्र करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई हो रही है। लोगों में भय, और असुरक्षा दूर हो रहा है। हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं। शांति लौट रही है। बड़ी संख्या में नक्सलवाद से जुड़े लोग आत्मसमर्पण कर रहे हैं। उन्होंने हिंसा का रास्ता छोडक़र मुख्यधारा में लाने के प्रयासों की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि  हिंसा का रास्ता छोड़ चुके लोगों को संविधान, और लोकतंत्र पर आस्था रखना चाहिए। उन्हें बरगला रहे लोगों पर आस्था नहीं रखनी चाहिए। 

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा व्यक्तिगत, और सामुदायिक विकास की आधारशिला है। उन्होंने जनजाति समाज के लोगों से अपील की है कि वो अपने बच्चों को पढ़ाएं। इसी से ही भारत का भविष्य उज्जवल होगा।  

संविधान के सर्वोच्च पद तक पहुंचने की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए मुर्मू ने कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दर्शाता है कि ओडिशा के एक छोटे से गांव की बेटी आज राष्ट्रपति के रूप में आपको संबोधित कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘आपमें और भी अधिक साहस और शक्ति है। सरकार आपके प्रति समर्पित है।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार समाज के गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और इस बात पर जोर दिया कि इन वंचित तबकों का उत्थान सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।

राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ को पिछड़ा राज्य मानने से इनकार करते हुए राज्य की भव्यता और सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डाला।  उन्होंने आदिवासी समुदायों की संस्कृति को अमूल्य, प्राचीन और स्थायी बताया तथा कहा कि जो लोग समावेशिता एवं समानता को समझना चाहते हैं, उन्हें बस्तर पंडुम का अनुभव करना चाहिए।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और अन्य लोग उपस्थित थे।


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