ताजा खबर

बच्चों के खिलाफ अपराधों पर काबू के लिए हर जिले में त्वरित अदालत की आवश्यकता : स्वाति मालीवाल
06-Feb-2026 8:34 PM
बच्चों के खिलाफ अपराधों पर काबू के लिए हर जिले में त्वरित अदालत की आवश्यकता : स्वाति मालीवाल

नयी दिल्ली, 6 फरवरी। आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल ने शुक्रवार को यौन अपराधों से बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए जल्दी सुनवाई की खातिर देश के हर जिले में त्वरित अदालत स्थापित करने की मांग की।

उच्च सदन में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की फौजिया खान के निजी विधेयक (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (संशोधन) विधेयक 2024) पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए मालीवाल ने पुलिस के लिए संसाधन बढ़ाने और उनकी जवाबदेही तय करने की भी मांग की।

यौन हिंसा के पीड़ितों के सामने आने वाली चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि मामलों के निपटारे में बहुत समय लगता है और अदालतों में पाक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत दर्ज तीन लाख से अधिक मामले लंबित हैं।

मालीवाल ने कहा, "हर जिले में त्वरित अदालत नहीं हैं और जहां हैं भी, वहां न्याय की प्रक्रिया तेज नहीं है।"

महिलाओं और बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के उपायों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "हर जिले में फास्ट ट्रैक (त्वरित) अदालत होनी चाहिए और उन्हें त्वरित तरीके से काम करना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में आधुनिक फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वे प्रयोगशालाएं खराब स्थिति में हैं और वर्षों से नमूने उन प्रयोगशालाओं में बेकार पड़े हुए हैं।

मालीवाल ने कहा, "यदि फोरेंसिक नमूने समय पर उपलब्ध कराए जाएं, तो अदालतों में मामलों की सुनवाई में तेजी आने की संभावना है।" उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों से बलात्कार पीड़ितों की अपने मामलों को लड़ने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल पुलिस और सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, "इसके लिए कानून का ईमानदारी से पालन जरूरी है।" उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस के संसाधनों में वृद्धि की जानी चाहिए और उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

मालीवाल ने कहा कि पुलिस जांच में कमजोरी, फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में नमूनों का वर्षों तक बेकार पड़े रहना और पीड़ित लड़कियों के लिए उचित सहायता प्रणाली का अभाव जैसे विभिन्न कारकों के कारण यौन उत्पीड़न के मामलों में केवल 14.3 प्रतिशत दोषसिद्धि हो रही है।

उन्होंने लोक अभियोजकों की संख्या बढ़ाने और उनकी जवाबदेही तय करने की भी मांग की। (भाषा)


अन्य पोस्ट