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महिला को गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता: शीर्ष अदालत
06-Feb-2026 8:28 PM
महिला को गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता: शीर्ष अदालत

नयी दिल्ली, 6 फरवरी। उच्चतम न्यायालय ने 17-वर्षीय लड़की के 30 सप्ताह के गर्भ को चिकित्सकीय तौर पर समाप्त करने का निर्देश देते हुए शुक्रवार को कहा कि अदालतें किसी महिला, खासकर नाबालिग को, गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकतीं।

न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने इस बात का संज्ञान लिया कि लड़की पड़ोस के एक लड़के के साथ संबंध में थी और इसी दौरान वह गर्भवती हो गई थी और उसने चिकित्सकीय रूप से अपनी गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति देने का अदालत से आग्रह किया है।

पीठ ने मुंबई के जेजे अस्पताल को नाबालिग की गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने का निर्देश दिया, साथ ही यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि सभी आवश्यक चिकित्सा सुरक्षा उपायों का पालन किया जाए।

पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ने इस तथ्य पर विचार किया था कि नाबालिग बच्ची को गर्भावस्था जारी रखने का अधिकार है, लेकिन यह गर्भ ‘‘अवैध’’ था, क्योंकि स्वयं बच्ची नाबालिग है और एक रिश्ते से उत्पन्न दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति के कारण गर्भ धारण कर चुकी है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि संबंध सहमति से बनाया गया था या यह यौन उत्पीड़न का परिणाम था।

न्यायालय ने अस्पताल के चिकित्सा बोर्ड की रिपोर्ट पर ध्यान दिया कि यदि बच्चे को पूर्ण अवधि के बाद जन्म देने की अनुमति दी जाती है तो बच्चे और मां के जीवन को कोई खतरा नहीं है।

पीठ ने कहा, ‘‘यदि मां के हितों को ध्यान में रखना है, तो उसकी प्रजनन स्वायत्तता पर पर्याप्त जोर दिया जाना चाहिए। अदालत किसी भी महिला, विशेषकर नाबालिग बच्ची को, गर्भावस्था पूरी करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती, यदि वह ऐसा करने का इरादा नहीं रखती है।’’

इसमें कहा गया कि यद्यपि बच्चे का जन्म अंततः एक जीवन की शुरुआत है, लेकिन वर्तमान मामले में निर्णायक कारक नाबालिग की गर्भावस्था को जारी रखने की स्पष्ट और लगातार अनिच्छा है।

पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘एक और सवाल है; अगर वह (नाबालिग) 24 सप्ताह का गर्भ समाप्त करा सकती है, तो 30 सप्ताह का क्यों नहीं? आखिरकार, वह गर्भावस्था जारी नहीं रखना चाहती। मूल बात यह है कि वह बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती, यही मुश्किल है।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि वह अस्पताल के हित में आदेश का मुख्य हिस्सा जारी करेगी, जबकि विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा। (भाषा)


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