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बस्तर अब भय नहीं, विश्वास और विकास का प्रतीक बना- मोदी
05-Feb-2026 9:30 PM
बस्तर अब भय नहीं, विश्वास और विकास का प्रतीक बना- मोदी

संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा 

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

नई दिल्ली/रायपुर, 5 फरवरी। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने गुरुवार राज्यसभा में अपने उद्बोधन के दौरान बस्तर का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि जो बस्तर कभी आकांक्षी जिला माना जाता था, आज वह पूरे देश में “बस्तर ओलंपिक” के नाम से जाना जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास की धारा अब बस्तर के गांव-गांव तक पहुंच रही है। कई गांवों में पहली बार बस सेवा शुरू हुई, जिसे ग्रामीणों ने उत्सव की तरह मनाया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय कुछ जिलों को पिछड़ा मानकर छोड़ दिया गया था। वहां रहने वाले करोड़ों लोगों की मौलिक जरूरतों की अनदेखी की गई, जिससे हालात और बदतर होते चले गए। ऐसे जिलों को “पनिशमेंट पोस्टिंग” के रूप में देखा जाने लगा था। इस सोच को बदलते हुए यह निर्णय लिया गया कि पिछड़े क्षेत्रों में योग्य, युवा और होनहार अधिकारियों को तैनात किया जाएगा और उन्हें स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर दिया जाएगा। आज देश इसके सकारात्मक परिणाम देख रहा है।

प्रधानमंत्री के वक्तव्य पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है। प्राकृतिक दृष्टि से समृद्ध यह क्षेत्र धरती का स्वर्ग कहा जा सकता है। यहां कुटुमसर जैसी विश्वविख्यात गुफा, अबूझमाड़ का विशाल वन क्षेत्र, अनेक सुंदर जलप्रपात और विश्व पर्यटन संस्था द्वारा चयनित धुड़मारास जैसे गांव हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास से वंचित रहा, जबकि इसका क्षेत्रफल केरल राज्य से भी बड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और सुरक्षा बलों के साहस से बस्तर में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है और विकास ने नई गति पकड़ी है।

उन्होंने बताया कि इसी बदले हुए विश्वास का परिणाम बस्तर ओलंपिक है, जिसका आयोजन पिछले वर्ष से किया जा रहा है। पिछले वर्ष इसमें 1 करोड़ 65 लाख युवाओं ने भाग लिया, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 3 करोड़ 91 लाख तक पहुंच गई है। बस्तर पंडुम का आयोजन भी पिछले वर्ष हुआ और इस वर्ष भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम का शुभारंभ 7 फरवरी को महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से होगा, जबकि समापन 9 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बार-बार बस्तर का उल्लेख किया जाना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब भय और पिछड़ेपन की पहचान नहीं, बल्कि विश्वास, विकास और संभावनाओं का प्रतीक बन रहा है। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि यदि नीति, नीयत और नेतृत्व सही हो, तो दशकों की उपेक्षा को भी बदला जा सकता है।


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