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भारत ने 2036 के ओलंपिक की मेजबानी की दावेदारी पेश की है, लेकिन प्रशासन, बुनियादी सुविधाओं और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को लेकर उठ रहे कुछ सवाल इसके सच होने में बड़ी चुनौती बने हुए हैं.
इस महीने की शुरुआत में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट जैसे हालिया सुधारों का जिक्र करते हुए 2036 ओलंपिक की मेजबानी करने के भारत के इरादे को फिर से दोहराया. मोदी ने कहा, "2030 कॉमनवेल्थ गेम्स भारत में होंगे. देश 2036 ओलंपिक की मेजबानी करने के लिए जोरदार कोशिशें कर रहा है. इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों को मुकाबले में हिस्सा लेने के बड़े मौके उपलब्ध कराना है.”
पिछले साल जुलाई में, भारतीय अधिकारियों ने स्विट्जरलैंड के लुजान शहर में स्थित अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के हेडक्वार्टर का दौरा किया था और गुजरात के तेजी से बढ़ते शहर अहमदाबाद को मेजबानी के लिए पेश किया था.
अहमदाबाद और उसके पड़ोसी शहर गांधीनगर ने ओलंपिक से जुड़ी एक योजना पेश की है. इसमें करीब 4.1 अरब से 7.5 अरब डॉलर का खर्च आने का अनुमान लगाया गया है.
हालांकि, कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत के दौरान आईओसी ने तीन मुख्य चिंताएं जताई हैं. इनमें भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के अंदर प्रशासनिक समस्याएं, डोपिंग के बहुत ज्यादा मामले और ओलंपिक खेलों में भारत का कमजोर प्रदर्शन शामिल है.
तैयारी को लेकर बंटी हुई है विशेषज्ञों की राय
भारतीय खेल प्रशासक और एथलीट भी इस बात पर बंटे हुए हैं कि क्या भारत दुनिया के सबसे बड़े खेल इवेंट की मेजबानी के लिए तैयार है. जाने-माने स्पोर्ट्स मेडिसिन और एंटी-डोपिंग एक्सपर्ट पी. एस. एम. चंद्रन का मानना है कि भारत की चुनौतियों को लेकर जो बातें कही जा रही हैं, वे कुछ ज्यादा ही बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई हैं.
ओलंपिक और एशियन गेम्स में भारत के लिए टीम डॉक्टर रह चुके चंद्रन ने डीडब्ल्यू को बताया, "प्रदूषण कोई मुद्दा नहीं है क्योंकि अहमदाबाद दावेदारी कर रहा है, दिल्ली नहीं. एथलीट कहीं और ट्रेनिंग कर सकते हैं.”
डोपिंग के मामले में चंद्रन को लगता है कि आंकड़े इसलिए ज्यादा दिखते हैं क्योंकि भारत बहुत ज्यादा टेस्ट करता है. साथ ही, उनका मानना है कि मेजबानी की दावेदारी को परखते समय भारत के कम पदकों से कोई खास फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने कहा, "आखिरकार, प्रदूषण, डोपिंग या मेडल, इनमें से कोई भी चीज नतीजे तय नहीं करेगी. बोली लगाने की प्रक्रिया में जो सबसे ज्यादा मायने रखता है, वह है पैसा और रसूख.”
भारत को बड़े खेल आयोजनों की मेजबानी का अनुभव है. 1951 और 1982 में एशियन गेम्स नई दिल्ली में आयोजित किए गए थे. राजधानी दिल्ली ने 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स की भी मेजबानी की थी. अब अहमदाबाद 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करने जा रहा है.
शाजी प्रभाकरन, फुटबॉल एडमिनिस्ट्रेटर हैं और ऑल-इंडिया फुटबॉल फेडरेशन के पूर्व जनरल सेक्रेटरी रह चुके हैं. उनके मुताबिक, भारत को अब अपनी क्षमताओं को दुनिया के सामने दिखाना चाहिए. उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया, "यहीं पर स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी काम आती है. कतर ने भी इसमें अपनी दिलचस्पी दिखाई है. 2022 फीफा वर्ल्ड कप का उसका बुनियादी ढांचा उसके लिए सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है. यह मुकाबला काफी कड़ा होगा.”
2036 की मेजबानी के लिए मुकाबला अभी से बहुत तेज हो गया है. इंडोनेशिया, तुर्की, चिली और सऊदी अरब जैसे देश पहले ही कतार में हैं. जर्मनी भी 2036, 2040 या 2044 के लिए दावेदारी पर विचार कर रहा है, जिसमें म्यूनिख, कोलोन और हैम्बर्ग संभावित मेजबान शहर हो सकते हैं. प्रभाकरन ने आगे कहा, "अगर हम 2036 की रेस में सफल नहीं हो पाते हैं, तो 2040 के दशक में ओलंपिक की मेजबानी की संभावना अधिक नजर आती है.”
क्या एक दशक बहुत जल्दी है?
मशहूर लॉन्ग जंपर अंजू बॉबी जॉर्ज ने भारत की दावेदारी का कड़ा समर्थन किया है. उनका कहना है कि अब भारत के पास ओलंपिक की मेजबानी करने की पूरी क्षमता है. उन्होंने कहा, "हम दावेदारी के मामले में जर्मनी से किसी तरह कम नहीं हैं. हम तैयार हैं.”
2003 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली अंजू बॉबी जॉर्ज ने कहा कि जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को निखारने वाले प्रोग्राम (ग्रासरूट टैलेंट प्रोग्राम) और नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल, भारत की तैयारियों की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण कदम हैं.
पिछले साल पास हुए इस बिल का मकसद खेल संघों पर नियंत्रण रखना, उनके मैनेजमेंट को सुधारना और जिम्मेदारी तय करना है. इसने नैतिक तौर-तरीकों को बढ़ावा देने के लिए ‘नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड' और विवादों को सुलझाने के लिए ‘नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल' की स्थापना की है.
डोपिंग की समस्या को मानते हुए, उन्होंने खेल संघों पर जोर दिया कि वे इस मामले में सख्त और ठोस कदम उठाएं. उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया, "ओलंपिक की मेजबानी करने से खेल और देश दोनों का कद बढ़ेगा, क्योंकि इसमें राष्ट्रीय गौरव दांव पर लगा है.”
क्या देश 2044 के लिए तैयार है?
प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए, अनुभवी खेल पत्रकार शारदा उग्रा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि हमें फूंक-फूंक कर कदम रखना चाहिए. उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया "आज सुबह अहमदाबाद की हवा का एअर क्वालिटी इंडेक्स 165 से ऊपर है, जो अनहेल्दी कैटेगरी में आता है. इस पर दुनिया भर में ध्यान दिया जाएगा. जब आप ओलंपिक के लिए बोली लगाते हैं, तो हर चीज की जांच होती है.”
वह अहमदाबाद को एक ऐसे शहर के रूप में देखती हैं जो आधुनिक तो हो रहा है, लेकिन अभी तक वैश्विक स्तर पर इतना बड़ा आयोजन करने के लिए तैयार नहीं हुआ है. उन्होंने कहा, "ओलंपिक की मेजबानी करने वाला हर शहर एक जाना-माना और आधुनिक वैश्विक शहर रहा है, जैसे कि जर्मनी के दावेदार शहर हैं. अहमदाबाद एक आधुनिक शहर बनने की कोशिश कर रहा है और अगले दशक में उसे इसका सबूत देना होगा.”
भारत की विशालता, खेल प्रशासन, बुनियादी ढांचे तथा पर्यावरणीय जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए, शारदा उग्रा का मानना है कि 2040 का दशक एक अधिक व्यावहारिक समय है. उन्होंने कहा, "भारत को अपनी योग्यता दिखाने के लिए सबसे पहले कई वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेजबानी करनी होगी.”


