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मध्यप्रदेश से लाए जा रहे बाघ, तमोर पिंघला में तैयारी
30-Jan-2026 5:11 PM
मध्यप्रदेश से लाए जा रहे बाघ, तमोर पिंघला में तैयारी

बीजापुर में घायल बाघ स्वस्थ, लेकिन जंगल नहीं छोडऩे पर सवाल

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 30 जनवरी। मध्यप्रदेश से बाघ लाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इसके लिए गुरू घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व में बाड़ा आदि बनाने का काम चल रहा है। इससे परे बीजापुर वनमंडल में शिकारियों के फंदे में फंसकर घायल बाघ की हालत अब बेहतर है। मगर उसे छोड़ा नहीं जा रहा है। 

पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) अरूण पांडेय ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में बताया कि बीजापुर वन मंडल में कुछ महीने पहले शिकारियों के फंदे में फंसकर घायल बाघ अब बेहतर स्थिति में है। मगर पैर में ऑपरेशन की वजह से चलने-फिरने में अब भी थोड़ी दिक्कत है। अभी छोड़ देने से बाघ को शिकार आदि में दिक्कत आ सकती है। चिकित्सकों से राय के बाद अभी फिलहाल नहीं छोडऩे का फैसला लिया गया है।

दूसरी तरफ, मध्यप्रदेश से बाघ लाने की तैयारी पूरी हो गई है। पहले चरण में एक बाघ यहां लाए जाएंगे, और फिर उसे गुरू घासीदास टाइगर रिजर्व में रखा जाएगा। इसके लिए एक हेक्टेयर का बाड़ा (एन्क्लोजर) भी तैयार किया जा रहा है।

हालांकि वन्य प्राणी विशेषज्ञ नितिन सिंघवी ने एक बयान में आयातित बाघ को लाने की तैयारी और यहां के स्वस्थ हो चुके बाघ को नहीं छोडऩे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि बीजापुर वन मंडल में अप्रैल 2025 में एक बाघ शिकारियों द्वारा लगाए गए लोहे के फंदे में फँसकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। वन विभाग की निष्क्रियता के चलते लगभग 20 दिनों तक बाघ फंदे के साथ घूमता रहा, जिससे उसका घाव और गहरा हो गया। बाद में उसे उपचार हेतु नंदनवन जंगल सफारी, रायपुर लाया गया। 30 जुलाई 2025 को उस बाघ की एक जटिल लेकिन सफल सर्जरी की गई। सर्जरी के लगभग चार महीने बाद, नवंबर 2025 में की गई विस्तृत चिकित्सकीय जांच में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने बाघ को क्लिनिकली स्वस्थ, सक्रिय और पूरी तरह चलने-फिरने में सक्षम पाया।

सिंघवी ने आगे बताया कि सर्जरी के चार माह बाद डॉ. पियूष दुबे, डॉ. संतोष आदिल, डॉ. पी. के. चंदन एवं डॉ. जे. के. जाडिया द्वारा की गई जांच में पाया गया कि बाघ पूरी तरह स्वस्थ और सतर्क है। सर्जरी का घाव पूरी तरह भर चुका है और वहां दोबारा बाल उग आए हैं। बाघ घायल पैर पर पूरा वजन डाल पा रहा है तथा पंजे की पकड़ (ग्रिप) सामान्य है। चलने, दौडऩे या जमीन से उठते समय दर्द के कोई लक्षण नहीं दिखे। सर्जरी के चार महीने बाद बाघ की हालत बहुत अच्छी है और उसकी शारीरिक क्षमता संतोषजनक पाई गई है।

नितिन सिंघवी ने आरोप लगाया कि विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों द्वारा स्पष्ट रूप से यह कहे जाने के बावजूद कि बाघ पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य रूप से चल-दौड़ सकता है, दो माह बीत जाने के बाद भी वन विभाग ने अब तक इस बाघ को उसके उपयुक्त प्राकृतिक आवास में सॉफ्ट रिलीज़ करने की कोई ठोस योजना नहीं बनाई है। न तो कोई समय-सीमा तय की गई है और न ही कोई आधिकारिक पहल दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि जब विशेषज्ञ डॉक्टर लिखित रूप में स्पष्ट कर चुके हैं कि बाघ पूर्णत: स्वस्थ है, तो एक दिन की भी अनावश्यक देरी उसके प्राकृतिक अधिकारों और वन्यजीव संरक्षण के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

 

कोर्ट से क्यों छुपाई...

नितिन सिंघवी ने बताया कि नवंबर 2024 में कोरिया जिले में बाघ के शिकार के बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की थी। इसके बावजूद 27 अक्टूबर 2025 और 10 दिसंबर 2025 को कोर्ट में यह कहा गया कि किसी नई पोचिंग की घटना की जानकारी नहीं है। जबकि अप्रैल 2025 में बीजापुर वन मंडल में बाघ के पोचिंग की यह गंभीर घटना हुई थी और बाद में वही बाघ जंगल सफारी में रखा गया। यह घटना प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) के संज्ञान में पूरी तरह थी।

सिंघवी ने सवाल उठाया कि जब यह घटना विभाग के संज्ञान में थी, तो इसे हाईकोर्ट से क्यों छुपाया गया और क्यों कहा गया कि किसी नई पोचिंग की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बारे में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि यह न केवल न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आ सकता है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण जैसे संवेदनशील विषय में पारदर्शिता की कमी को भी उजागर करता है।


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