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प्रवासी पक्षियों के आशियाने पर खतरा, वन विभाग नहीं कर रहा निगरानी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 30 जनवरी। छत्तीसगढ़ के पहले रामसर स्थल कोपरा जलाशय की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। संरक्षित घोषित किए जाने के बावजूद यहां खुलेआम पानी चोरी का मामला सामने आया है। गुरुवार को राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे जलाशय के किनारे 12 हजार और 20 हजार लीटर क्षमता वाले टैंकरों में जनरेटर और पंप के जरिए पानी भरा जाता पाया गया।
कोपरा जलाशय प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास है। इसी क्षेत्र से तेज गति से पानी निकाले जाने के कारण जलस्तर घटता देखा गया, जिससे जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह जल दोहन से पक्षियों के भोजन, प्रजनन और विश्राम स्थलों को भारी क्षति पहुंच सकती है।
रामसर स्थल घोषित होने के बाद वन विभाग को क्षेत्र की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मछली पकड़ने और अन्य गतिविधियों पर रोक, चेतावनी बोर्ड और जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए थे। इसके बावजूद जलाशय से सटे राजमार्ग पर इस तरह की गतिविधि का सामने आना विभागीय लापरवाही को उजागर करता है। हैरानी की बात यह है कि तखतपुर रेंज का कार्यालय कुछ ही किलोमीटर दूर स्थित है।
घटना के दौरान एक वन विभाग का वाहन मौके पर पहुंचा। चालक और साथ बैठे व्यक्ति से बातचीत के बाद वाहन वहां से चला गया। यह वाहन किस अधिकारी का था और किस उद्देश्य से आया, इसकी जांच की जा रही है। इस घटनाक्रम ने विभागीय संलिप्तता की आशंका को और गहरा कर दिया है।
पानी भरते पाए गए दोनों टैंकर मध्यप्रदेश पासिंग के थे। मालूम हो कि राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे लगाए गए रामसर स्थल के सूचना बोर्ड भी उखाड़कर कुछ दिन पहले ले जाया जा चुका है, जिससे नियमित निगरानी के अभाव की पुष्टि होती है।


