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सीएम से शिकायत
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 29 जनवरी। प्रदेश में तेंदूपत्ता के टेंडर में अनियमितता का मामला प्रकाश में आया है। बताया गया कि डेढ़ सौ से अधिक लॉट स्वीकृति के बाद निरस्त कर दिए गए। खास बात ये है कि आईडीसी (इंटर डिपार्टमेंट कमेटी)की मंजूरी के बाद भी संघ ने अपने स्तर पर स्वीकृति निरस्त किए हैं। इस पूरे मामले की शिकायत तेंदूपत्ता एसोसिएशन ने सीएम विष्णुदेव साय, और विभागीय मंत्री केदार कश्यप से की है। यह भी कहा कि गड़बड़ी को ठीक नहीं किया गया, तो कोर्ट जाएंगे। साथ ही अगली नीलामी में भी हिस्सा नहीं लेंगे।
इस पूरे मामले पर ‘छत्तीसगढ़’ ने लघु वनोपज संघ के एमडी अनिल साहू से चर्चा की कोशिश की लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। टेंडर प्रक्रिया को लेकर ठेकेदारों में नाराजगी सामने आई है। तेंदूपत्ता एसोसिएशन ने इस पूरे मामले में एमडी को पत्र लिखकर प्रक्रिया पर आपत्ति की है। उन्होंने पत्र में प्रथम रिजल्ट में किए गए बदलाव, वेबसाइट से रिजल्ट हटाने और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं।
पत्र के अनुसार 23 जनवरी 2026 को प्रथम निविदा के तहत 586 लॉट स्वीकृत किए गए थे, लेकिन बाद में अप्रत्याशित रूप से रिजल्ट में संशोधन कर 429 लॉट ही स्वीकृत किए गए। पत्र में इसे छत्तीसगढ़ राज्य के इतिहास में पहली बार बताया गया है, जब निविदा परिणाम को संशोधित किया गया हो।
आपत्ति में यह भी कहा गया है कि 28 जनवरी 2026 की रात को संघ की वेबसाइट से मूल और संशोधित—दोनों रिजल्ट हटा दिए गए, जो कि अवैधानिक है। पत्र में उल्लेख है कि प्रथम रिजल्ट के आधार पर देशभर के व्यापारी एवं निर्माता पहले ही गोदाम, बारदाना, स्टाफ आदि की व्यवस्थाएं पूरी कर चुके थे। ऐसे में बाद में रिजल्ट बदलना व्यापारियों के साथ अन्याय है।
पत्र में चेतावनी दी गई है कि इस तरह के निर्णयों से संघ की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है और भविष्य में व्यापारियों का भरोसा कायम रहना मुश्किल होगा। साथ ही कहा गया है कि पहले 23 जनवरी को रिजल्ट अपलोड करने, फिर 28 जनवरी को रिजल्ट डालने और उसी रात दोनों हटाने की प्रक्रिया न्यायोचित नहीं है।
व्यापारियों की ओर से मांग की गई है कि प्रथम रिजल्ट को यथावत रखा जाए, ताकि संघ पर विश्वास बना रहे। पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि उचित निर्णय नहीं लिया गया तो व्यापारी आरटीआई, न्यायालय की शरण और आगामी निविदाओं के बहिष्कार जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे।


