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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नेता उमा भारती ने अविमुक्तेश्वरानंद की शंकराचार्य की उपाधि को लेकर हो रहे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा."
बीजेपी नेता का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से शंकराचार्य होने का सबूत मांगकर प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं और अधिकारों का उल्लंघन किया है.
उन्होंने कहा, "यह अधिकार सिर्फ़ शंकराचार्यों और विद्वत परिषद का है."
क्या है मामला?
कुछ दिन पहले गंगा में स्नान से रोकने के आरोपों के बीच मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी किया है. नोटिस में उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया था कि वह ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य की उपाधि का इस्तेमाल किस आधार पर कर रहे हैं.
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, "मौनी अमावस्या के मौके़ पर अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों के साथ संगम में स्नान के लिए जा रहे थे और आरोप है कि पुलिस ने उन्हें रोक दिया.
घटना के बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर के बाहर धरना शुरू कर दिया, और मेला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से माफ़ी की मांग की. (bbc.com/hindi)


