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बेडरूम में सीसीटीवी, पत्नी पर फ्रेंड से वीडियो कॉल का आरोप
27-Jan-2026 2:09 PM
बेडरूम में सीसीटीवी, पत्नी पर फ्रेंड से वीडियो कॉल का आरोप

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला रद्द कर नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया
'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 27 जनवरी। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से जुड़ा पति-पत्नी का एक विवाद हाईकोर्ट के सामने आया है, जिसमें बेडरूम में सीसीटीवी कैमरा लगाने और निजी आचरण को लेकर आरोप लगाए गए हैं। पत्नी ने पति पर कमरे में कैमरा लगाकर निगरानी करने का आरोप लगाया, वहीं पति ने पत्नी पर आपत्तिजनक चैटिंग और वीडियो कॉल का दावा किया है।

मामले के अनुसार महासमुंद की रहने वाली महिला की शादी वर्ष 2012 में रायगढ़ जिले के युवक से हुई थी। पति जिंदल पावर तमनार में कार्यरत था, जिसके चलते विवाह के कुछ समय बाद पत्नी भी उसके साथ तमनार आकर रहने लगी।

महिला का आरोप है कि तमनार आने के बाद पति अतिरिक्त पैसों की मांग करने लगा और उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। इतना ही नहीं, उस पर नजर रखने के लिए पति ने चुपचाप बेडरूम में सीसीटीवी कैमरा भी लगा दिया। विरोध करने पर मारपीट और घर से निकालने की धमकी दी गई।

नवंबर 2019 में दोनों परिवारों ने सुलह की कोशिश की, लेकिन पति ने साथ रहने से इनकार कर दिया। इसके बाद पत्नी ने तमनार थाना में शिकायत दर्ज कराई और फैमिली कोर्ट में दांपत्य अधिकार बहाली की याचिका भी लगाई।

वहीं पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल करते हुए पत्नी पर अश्लील चैटिंग और अन्य पुरुषों से वीडियो कॉल करने के आरोप लगाए। इन आरोपों को साबित करने के लिए उसने बेडरूम में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग को सीडी के रूप में कोर्ट में पेश किया।

महासमुंद फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज वाली सीडी को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी का प्रमाण पत्र न होने के कारण स्वीकार नहीं किया। वहीं पत्नी की दांपत्य अधिकार बहाली की याचिका मंजूर कर ली गई।

पति ने फैमिली कोर्ट के आदेश को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट में जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की युगल पीठ ने फैमिली कोर्ट के दोनों आदेशों को निरस्त कर दिया।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फैमिली कोर्ट अधिनियम 1984 की धारा 14 और 20 के तहत फैमिली कोर्ट को विवाद के प्रभावी निपटारे के लिए तकनीकी औपचारिकताओं से परे जाकर साक्ष्य स्वीकार करने का अधिकार है।
कोर्ट ने कहा कि केवल 65-बी प्रमाण पत्र के अभाव में सीसीटीवी फुटेज, सीडी या अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को खारिज नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि सीसीटीवी फुटेज को रिकॉर्ड पर लिया जाए, उस पर जिरह की अनुमति दी जाए और दोनों मामलों की नए सिरे से सुनवाई कर जल्द निर्णय किया जाए। चूंकि मामला चार साल से अधिक समय से लंबित है, इसलिए फैमिली कोर्ट को प्राथमिकता के आधार पर निपटारा करने को कहा गया है।


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