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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से मेला प्रशासन को नोटिस का जवाब भेजा गया
22-Jan-2026 8:59 PM
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से मेला प्रशासन को नोटिस का जवाब भेजा गया

प्रयागराज (उप्र), 22 जनवरी। माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या स्नान करने से मेला पुलिस और प्रशासन द्वारा कथित तौर पर रोके जाने के बाद जारी विवाद के बीच स्वामी की ओर से मेला प्रशासन को दूसरे नोटिस का जवाब भेज दिया गया है।

मेला प्रशासन ने दूसरे नोटिस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछा था कि क्यों न उनकी संस्था को दी जा रही भूमि एवं सुविधाओं को निरस्त कर उन्हें सदैव के लिए मेले में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया जाए।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया है कि मेला प्रशासन द्वारा लगाया गया यह आरोप कि स्वामी जी बग्घी से मौनी अमावस्या स्नान के लिए गए थे, पूरी तरह निराधार और दुर्भावनापूर्ण है तथा फिलहाल न तो स्वामी के शिविर में और न ही उनके किसी आश्रम में कोई बग्घी है।

मेला प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस में कहा गया था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मौनी अमावस्या पर आरक्षित पुल संख्या दो पर लगे बैरियर को तोड़ते हुए बग्घी पर सवार होकर भीड़ के साथ जा रहे थे। उस समय स्नानार्थियों की अत्यधिक भीड़ थी और केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी।

अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से नोटिस के जवाब में यह भी कहा गया है कि महाराज श्री विशेष परंपरागत पालकी से संगम स्नान करने जा रहे थे जिसमें छह इंच के व्यास वाले स्टील के पहिये लगे हैं तथा इन पहियों की सहायता से कभी-कभी भक्त उसे (पालकी को) धकेल कर आगे बढ़ाते हैं। पालकी में घोड़े और मोटर का कोई प्रावधान नहीं है।

साथ ही नोटिस में बैरीकेड तोड़ने के आरोप के जवाब में कहा गया है कि महाराज श्री ने पुलिसकर्मियों से बात कर बैरीकेड खुलवाया था।

जवाब में मेला प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि यदि मेला प्रशासन के अधिकारी कोई गैर कानूनी, असंवैधानिक, दुर्भावनापूर्ण अनुचित कदम उठाते हैं तो सक्षम न्यायालय में दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सम्यक कार्यवाही करने के लिए ‘हम बाध्य होंगे।’

मेला प्रशासन ने दूसरे नोटिस में कहा था, “इस कृत्य के कारण मेला पुलिस और मेला प्रशासन को भीड़ प्रबंधन में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्वामी जी के इस प्रकार प्रवेश से भगदड़ होने और उससे प्रबल जनहानि होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।”

नोटिस में कहा गया था, “आपके (स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद) इस कृत्य के कारण क्यों न आपकी संस्था को दी जा रही भूमि एवं सुविधाओं को निरस्त कर आपको सदैव के लिए मेले में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया जाए।”

इस नोटिस को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने कहा, “अब सरकार बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है। शंकराचार्य शिविर पंडाल के पीछे प्रशासन ने यह नोटिस चस्पा किया और वह भी पिछली तिथि (18 जनवरी) से। प्रशासन के कर्मचारी द्वारा बताने पर ही हम लोग इस नोटिस के बारे में जान सके।”

इससे पूर्व मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी कहा था कि दिवानी अपील पर उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया था कि जब तक अपील निस्तारित नहीं हो जाती, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता।

नोटिस में कहा गया था कि इससे अद्यतन स्पष्ट है कि कोई भी धर्माचार्य ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं किया गया है, इसके बावजूद प्रयागराज माघ मेला में 2025-26 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा अपने शिविर में लगाए गए बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य घोषित एवं प्रदर्शित किया गया है। (भाषा)


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