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हाईकोर्ट की सिफारिश पर परीक्षा व मूल्यांकन पद्धति में भी हुआ संशोधन
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 22 जनवरी। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायिक सेवा की भर्ती और सेवा शर्तों में अनेक संशोधन किए गए हैं। विधि विभाग ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायिक सेवा (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम, 2006 में बदलाव को लेकर अधिसूचना जारी की है। यह संशोधन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सिफारिश पर किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत अब न्यायिक अधिकारियों को पदोन्नति के लिए सिविल जज (कनिष्ठ और वरिष्ठ श्रेणी) के रूप में न्यूनतम 7 वर्ष की सेवा पूरी करना अनिवार्य होगा। पहले यह शर्त अपेक्षाकृत कम थी। साथ ही पदोन्नति के लिए किसी पद पर बने रहने की अवधि 5 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष कर दी गई है।
संशोधित नियमों में भर्ती कोटे में भी बड़ा परिवर्तन किया गया है। अब संबंधित श्रेणी में 65 प्रतिशत की जगह 50 प्रतिशत और 10 प्रतिशत की जगह 25 प्रतिशत का प्रावधान किया गया है। इस संबंध में 16 जनवरी 2026 को राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित की गई है, जिसकी प्रति हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल सहित सभी संबंधित विभागों को भेज दी गई है।
नए नियमों के अनुसार 4 प्रतिशत पद दिव्यांगजनों के लिए क्षैतिज आरक्षित किए गए हैं। इसमें 1 प्रतिशत दृष्टिबाधित, 1 प्रतिशत श्रवण बाधित (बधिर को छोड़कर), अस्थिबाधित, कुष्ठ रोग से मुक्त, बौनेपन, एसिड अटैक पीड़ित और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लिए तथा 1 प्रतिशत ऑटिज्म और बहु-दिव्यांगता के लिए तय किया गया है। योग्य उम्मीदवार न मिलने पर पद अगले भर्ती वर्ष में आगे बढ़ाया जाएगा।
अब चयन प्रक्रिया में न्यूनतम अर्हक अंक सामान्य वर्ग के लिए 60 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग (दिव्यांग सहित) के लिए 50 प्रतिशत तय किए गए हैं। मेरिट के आधार पर 1:3 के अनुपात में अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा।
100 अंकों का नया मूल्यांकन फॉर्मूला इस प्रकार है- निर्णय लेखन का मूल्यांकन: 30 अंक, पिछले 5 वर्षों की गोपनीय चरित्रावली: 10 अंक, प्रकरण निस्तारण दर: 10 अंक, सतर्कता रिपोर्ट: 10 अंक, विधि का अद्यतन ज्ञान: 10 अंक, सामान्य धारणा व संवाद कौशल: 10 अंक तथा साक्षात्कार: 20 अंक।


