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अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के इस कार्यकाल के पहले से ही, उनके चुनाव प्रचार के मुद्दों को लेकर हम उनके खिलाफ बड़ी तल्ख जुबान का इस्तेमाल करते आ रहे थे, कुछ लोगों को हमारी संपादकीय भाषा अटपटी भी लग रही थी, लेकिन हमने इस कॉलम में, या अपने यूट्यूब चैनल, इंडिया-आजकल पर ट्रम्प के लिए उन्हीं विशेषणों को जारी रखा था। कल जब ब्रिटिश संसद में एक सांसद एड डेवी ने ट्रम्प को इंटरनेशनल गैंगस्टर कहा, तो हमें कुछ राहत मिली कि हम अमरीका से दूर बैठे हुए वहां के राष्ट्रपति को गालियां देने का काम गैरजिम्मेदारी से नहीं कर रहे थे, बल्कि अमरीका के सबसे करीबी पश्चिमी सहयोगी देश ब्रिटेन की पार्लियामेंट ने भी ट्रम्प को असाधारण और ऐतिहासिक गालियां दी गई, और इंटरनेशनल गैंगस्टर कहा गया। इससे परे भी पिछले दो-चार दिनों में ही ट्रम्प के बारे में बिना गालियों के भी विश्व नेताओं ने जो कहा है, वह आज तक किसी अमरीकी राष्ट्रपति के लिए नहीं कहा गया था।
ट्रम्प ने जिस अंदाज में अपने दोस्त और दुश्मन देशों के बीच की सीमा रेखा को खत्म कर दिया है, उससे अमरीका की वैश्विक साख टके की रह गई है। अभी ट्रम्प के कार्यकाल के पूरे तीन साल बाकी हैं, और इन तीन बरसों में ऐसा कमीना अमरीकी राष्ट्रपति अपने देश के साथ-साथ पूरी दुनिया को बर्बाद करते दिख रहा है। जिस तरह से उसने डेनमार्क के अल्प स्वायत्तशासी इलाके ग्रीनलैंड को फौजी कार्रवाई से कब्जा करने की धमकी दी है, और एक नाटो सदस्य होने के कारण डेनमार्क के साथ खड़े रहने की बात करने वाले यूरोपीय देशों को टैरिफ की धमकी दी है, वह योरप को हक्का-बक्का कर चुकी है, और पश्चिम की इस बर्बादी के जश्न में पुतिन बेगानी शादी में दीवाने अब्दुल्ला की तरह डाँस कर रहा है, ट्रम्प की तारीफ कर रहा है, और योरप को कोस रहा है। अभी ठीक एक साल पहले तक योरप और अमरीका एक ही सैनिक गठबंधन नाटो के सदस्य थे, और आज ग्रीनलैंड के मुद्दे पर ट्रम्प और बाकी योरप एक-दूसरे के सामने खड़े हैं। जंग टैरिफ से शुरू हुई है, लेकिन अगर हथियारों से हमला होता है, तो योरप की यह नीतिगत मजबूरी होगी कि वह डेनमार्क के साथ एकमुश्त खड़ा रहे।
ट्रम्प की बददिमाग मनमानी, और सनक की वजह से, विस्तारवादी जंगखोर नीयत की वजह से आज पूरी दुनिया के बाजार अस्थिर हो गए हैं। बाजारों के अस्थिर होने का एक सबसे बड़ा संकेत सोने-चांदी का रेट होता है, जो कि आज आसमान को चीरकर अंतरिक्ष में पहुंच चुका है, लोगों को यह भरोसा नहीं है कि किसी भी तरह का पूंजी बाजार ट्रम्प के रहते सुरक्षित है, और इसलिए लोग आसमान चीर चुके दाम पर भी सोना-चांदी खरीदकर अपनी पूंजी को सुरक्षित कर रहे हैं। दुनिया भर के पूंजी बाजार जिस तरह से ट्रम्प की गुंडागर्दी के असर से औंधेमुंह पड़े हुए हैं, वह बताता है कि जब तक बाकी दुनिया मिलकर ट्रम्प नाम के इस दैत्य के मुकाबले खड़ी नहीं होगी, तब तक इस इंटरनेशनल गैंगस्टर की लूटमार जारी रहेगी, और दुनिया कमजोर, अस्थिर, और असुरक्षित बनी रहेगी।
यही वजह है कि यूरोपीय समुदाय की मुखिया उर्सुला फॉन ने यह साफ किया है कि ट्रम्प की टैरिफ धमकियों के आगे योरप नहीं झुकेगा, और एक होकर लड़ेगा। इस तरह की बातें एक-एक करके फ्रांस के राष्ट्रपति, और दूसरे कई नेताओं ने भी की है, और ऐसा लगता है कि योरप का बर्दाश्त जवाब दे गया है, और अब उसे यह बात समझ आ गई है कि वह जितना दबता रहेगा, ट्रम्प उतना ही दबाता रहेगा, और ऐसे में वह दिन अधिक दूर नहीं है, जब दबा-कुचला योरप ट्रम्प का बंधुआ मजदूर होकर रह जाएगा। ऐसा वक्त इसलिए भी खतरनाक होगा कि योरप का परंपरागत फौजी दुश्मन, रूस किसी भी पल ट्रम्प की गोद में बैठे चहेते बच्चे की तरह हो सकता है, और वैसे में योरप अमरीकी फौजी साथ के बिना खराब मौसम में खुले आसमान के नीचे नंगे बदन साबित हो सकता है। इसलिए अब योरप के देश ट्रम्प के टैरिफ-बाहुबल का मुकाबला करने के लिए खड़े होते दिख रहे हैं। किसी गुंडे को एक सीमा से अधिक नंगा नाचने की इजाजत देना समाज के लिए ठीक नहीं होता है, इसलिए ट्रम्प नाम के इस मवाली को अमरीका तक सीमित रखना चाहिए, जहां के लोगों ने इसे चुना है, अपनी बर्बादी के लिए।
जिस अंदाज में ट्रम्प ने दुनिया में शांति स्थापित करने के नाम पर एक बोर्ड ऑफ पीस बनाया है, और जिस तरह वह उसमें 9 हजार करोड़ रूपए की फीस देने वाले देशों को स्थाई सदस्य बनाने की बात कर रहा है, वह अपने आपमें एक भयानक तानाशाह सोच है। पिछले दशकों में दुनिया के बहुत से मामलों में संयुक्त राष्ट्र संघ में जो अमरीका बहुमत के खिलाफ वीटो का इस्तेमाल करते आया है, वह आज अमरीकी तानाशाह के मातहत एक समानांतर संयुक्त राष्ट्र संघ खड़ा कर रहा है, उसे खारिज तो वह पहले ही कर चुका है, जब-जब इजराइल का मुद्दा आया, तो अमरीका और इजराइल का गिरोह संयुक्त राष्ट्र के खिलाफ जुर्म करते रहा है।
किसी एक देश के लोगों का चुनावी फैसला किस तरह पूरी दुनिया को बर्बाद कर सकता है, यह बात इतिहास में आज पहली बार इस तरह, इस हद तक साबित हो रही है। जर्मनी में वोटरों ने हिटलर को चुना था, लेकिन उसका प्रकोप योरप तक सीमित था। ट्रम्प की टैरिफ मार, उसके यूएसएड जैसे हर अमरीकी सरोकार को बंद करने के फैसले, ऐसे दर्जनों फैसले पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहे हैं। यह सिलसिला अगले तीन बरस तक और जारी रह सकता है, अगर अमरीकी राष्ट्रपति भवन से किसी कानूनी या गैरकानूनी तरीके से ट्रम्प की बिदाई नहीं होती है। आज इस अकेले आदमी ने दुनिया में सैकड़ों करोड़ लोगों का जीना हराम कर दिया है। दुनिया की अर्थव्यवस्था अस्थिर और चौपट कर दी है, करोड़ों लोगों को इलाज और टीकाकरण के लिए, मेडिकल जांच और पढ़ाई के लिए मिलने वाली अमरीकी मदद को बंद कर दिया है, पर्यावरण बचाने की कोशिशों से अमरीकी हिस्सेदारी को खत्म कर दिया है। योरप एक अकेला ऐसा समुदाय है जो कि इस बिफरे हुए जानवर को सींग से पकड़ सकता है, और इसे चुनौती दे सकता है। एक बरस के भीतर दुनिया का नक्शा किस तरह बदल गया है कि चीन और यूरोपीय समुदाय पास आ रहे हैं, भारत और चीन पास आ रहे हैं, अमरीका और रूस एक जुबान बोल रहे हैं, और दुनिया को ट्रम्प एक क्लब की तरह चला रहा है, 9-9 हजार करोड़ रूपए देकर मेम्बर बनने वाले देशों का क्लब!
यह बिफरा हुआ जानवर जितनी जल्द किसी पिंजरे या ताबूत में जाए, उतनी जल्दी दुनिया की बर्बादी थम सकेगी। हम लोकतंत्र और अहिंसा के हिमायती हैं, लेकिन लोगों की बद्दुआ से कई जिंदगियां खत्म हो सकती हैं, और आज की तारीख में धरती पर ट्रम्प से अधिक बद्दुआ झेलने वाला कोई और इंसान नहीं है।


