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महाराष्ट्र से छत्तीसगढ़ तक की उड़ान, उदंती-सीतानदी में मिला बीमार गिद्ध
21-Jan-2026 1:58 PM
महाराष्ट्र से छत्तीसगढ़ तक की उड़ान, उदंती-सीतानदी में मिला बीमार गिद्ध

 उपचार के लिए जंगल सफारी भेजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
गरियाबंद, 21 जनवरी।
महाराष्ट्र के ताडोबा अंधारी टाइगर रिज़र्व से लगभग 400 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व पहुंचे एक बीमार गिद्ध का वन विभाग की टीम ने समय रहते सुरक्षित रूप से पकड़ उपचार के लिए जंगल सफारी भेजा। ओडिशा से आए बीमार हाथियों के उपचार के बाद यह दूसरी बड़ी वन्यजीव रेस्क्यू कार्रवाई मानी जा रही है।
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में वन विभाग की टीम ने एक बीमार गिद्ध का रेस्क्यू किया है। गिद्ध की पहचान वाइट रंप्ड वल्चर के रूप में हुई है। उसके शरीर पर माइक्रो ट्रांसमीटर और जीपीएस लगा पाया गया, जिससे यह जानकारी मिली कि वह महाराष्ट्र के ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व से उड़ान भरकर इस क्षेत्र तक पहुंचा था।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वरुण जैन ने बताया कि मंगलवार सुबह लगभग 11 बजे इंदागांव (बफर) परिक्षेत्र अंतर्गत काण्डसर बीट में पेट्रोलिंग के दौरान फुट पेट्रोलिंग टीम के सदस्य राधेश्याम यादव ने गिद्ध को जमीन पर बैठी अवस्था में देखा। गिद्ध उडऩे में असमर्थ था। इसके बाद परिक्षेत्र अधिकारी सुशील कुमार सागर को सूचना दी गई और रेस्क्यू की प्रक्रिया शुरू की गई।

प्रारंभिक निरीक्षण में गिद्ध की तबीयत खराब पाई गई। वन विभाग के अनुसार इसकी वजह डी-हाइड्रेशन या बीमारी हो सकती है। रेस्क्यू के दौरान बिलासपुर के वल्चर विशेषज्ञ अभिजीत शर्मा ने टेलीफोनिक माध्यम से आवश्यक मार्गदर्शन दिया। मौके पर गिद्ध को पानी और आहार दिया गया तथा उसे सुरक्षित रूप से जंगल क्षेत्र से बाहर लाया गया। बीट गार्ड रामकृष्ण साहू के माध्यम से गिद्ध को गरियाबंद लाया गया।

इसके बाद जंगल सफारी, नया रायपुर से डॉ. जडिया और डॉ. ऋचा गरियाबंद पहुंचे। गिद्ध को रेस्क्यू केज में शिफ्ट किया गया और उपचार के लिए जंगल सफारी, नया रायपुर भेजा गया है। वन विभाग के अनुसार उपचार पूरा होने के बाद गिद्ध को उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।

यह रेस्क्यू अभियान वन मंत्री केदार कश्यप, पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ) अरुण पाण्डेय, उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व की फील्ड डायरेक्टर सतोविशा समाजदार, उप निदेशक वरुण जैन और डीएफओ जंगल सफारी तेजस शेखर के मार्गदर्शन में संचालित किया गया।
वन विभाग के अनुसार उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व का बड़ा हिस्सा पहाड़ी वनों से आच्छादित है और ओढ़-आमामोरा क्षेत्र में पूर्व में भी गिद्धों की उपस्थिति दर्ज की गई है। इस रेस्क्यू कार्य में इंदागांव परिक्षेत्र की टीम और जंगल सफारी की डॉक्टर टीम शामिल रही।


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