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-दिलीप कुमार शर्मा
बोडो और आदिवासी समुदायों के बीच तनाव के कारण असम सरकार ने कोकराझार ज़िले में मंगलवार को मोबाइल और इंटरनेट सेवा निलंबित कर दी है.
कोकराझार में सोमवार रात को एक कार दुर्घटना के बाद विवाद हुआ था और मंगलवार को यह सांप्रदायिक तनाव में बदल गया. फिलहाल इलाके की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रैपिड एक्शन फ़ोर्स (आरएएफ) को तैनात किया गया है.
आईजीपी अखिलेश सिंह ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी से कहा, "ज़िले की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है. असम पुलिस के जवानों के साथ सीआरपीएफ़ और रैपिड एक्शन फ़ोर्स के जवानों को तैनात किया गया है."
उन्होंने बताया कि हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए "फ्लैग मार्च किया गया. इसके अलावा 19 लोगों को हिरासत में लिया गया है. सबूतों के आधार पर और गिरफ्तारियां होंगी."
आईजीपी अखिलेश सिंह ने कहा, "इंटरनेट सेवा को फिलहाल कोकराझार जिले में बंद किया गया है."
असल में इस तनाव की शुरुआत सोमवार देर रात तब हुई जब बोडो समुदाय के तीन लोगों को लेकर जा रहा वाहन बोडोलैंड टेरिटोरियल क्षेत्र के अंतर्गत करिगांव इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया और इसमें दो आदिवासी घायल हो गए. इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई.
पुलिस ने बताया कि गाड़ी के अंदर बैठे लोगों पर भीड़ ने हमला किया. फिलहाल चार लोगों का कोकराझार मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है.
राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने एक नोटिफिकेशन में बताया कि भीड़ ने मंगलवार को करिगांव के पास नेशनल हाईवे को ब्लॉक कर दिया, टायर जलाए और कुछ घरों और एक ऑफ़िस की बिल्डिंग में आग लगा दी.
करिगांव में पुलिस चौकी पर भी हमला करने की कोशिश की गई.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा, "कोकराझार की स्थिति को सामान्य करने के लिए ज़िला प्रशासन के साथ ही मैं राज्य के शीर्ष अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हूं. शांति और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सेना को बुलाया गया है..."
बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल के चीफ़ हाग्रामा मोहिलारी ने लोगों से शांति की अपील की है. (bbc.com/hindi)


