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दोनों वारदात 2 अप्रैल को हुई लेकिन सात साल का अंतराल रहा
रायपुर, 21 जनवरी। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक हैरान करने वाली आपराधिक घटना सामने आई है। एक युवक को अपनी पत्नी की हत्या के आरोप से हाई कोर्ट ने बरी किया था, वह अब एक और महिला की मौत के मामले में पुलिस की गिरफ्त में है। दोनों घटनाएं ठीक 2 अप्रैल की तारीख पर हुईं, लेकिन सात साल के अंतराल के साथ। पुलिस का कहना है कि नई जांच में मिले सबूतों के बाद युवक को गिरफ्तार किया गया है।
यह कहानी शुरू होती है साल 2018 से। तब 21 साल के सूरज ध्रुव की 19 वर्षीय पत्नी संतोषी का शव उनके घर के पीछे एक नाले में मिला था। यह घटना भी 2 अप्रैल को हुई। सूरज ने खुद पुलिस को पत्नी के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच में पुलिस ने सूरज को मुख्य आरोपी बनाया। गवाहों के बयान, आरोपी का कबूलनामा और एक बांस की छड़ी को हत्या का हथियार बताते हुए सत्र अदालत ने 2019 में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। लेकिन छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 13 दिसंबर 2024 को इस फैसले को पलट दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष मामले को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा। संतोषी हत्याकांड में सत्र न्यायालय ने 2019 में सूरज ध्रुव को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 12 गवाहों, कथित स्वीकारोक्ति और बांस के डंडे को अहम साक्ष्य माना गया था। लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे अपराध सिद्ध नहीं कर सका और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी अधूरी रही। इसी आधार पर उसे बरी कर दिया गया। सबूतों की कड़ी पूरी नहीं हुई, इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। इस फैसले के बाद सूरज जेल से बाहर आया और सामान्य जीवन जीने लगा। लेकिन किस्मत ने फिर से मोड़ लिया।
बरी होने के ठीक एक साल बाद, जनवरी 2025 में सूरज फिर से सुर्खियों में आ गया। इस बार आरोप 55 साल की सुनीता राजक की हत्या का था। सुनीता पड़ोसी जिले धमतरी की रहने वाली थीं। उनके और उनके पति राजेश पर 7 लाख रुपये का कर्ज था। वे इस बोझ से छुटकारा पाने के लिए परेशान थे। पुलिस के मुताबिक, 30 जनवरी 2024 को सुनीता अपनी बहनों से मिलकर घर लौट रही थीं, तभी सूरज से उनकी मुलाकात हुई। सूरज ने उन्हें बस स्टैंड तक छोड़ने का ऑफर दिया, लेकिन इसके बजाय नौकरी दिलाने का वादा करके एक सुनसान इमारत में ले गया। यह जगह उसके किसी रिश्तेदार के घर के पास थी। वहां सुनीता दो महीने तक रहीं।
मार्च में जब सुनीता घर जाने की जिद करने लगीं, तो सूरज ने उन्हें जंगल में ले जाकर गला घोंट दिया। पुलिस का दावा है कि उसने सुनीता के सोने के गहने भी चुरा लिए। कुछ दिनों बाद, तेंदू पत्ता इकट्ठा करने वाले लोगों ने कोडार डैम के पास सागौन के जंगल में जला हुआ शव देखा और वन रक्षक को सूचना दी। पुलिस को सूचना मिली और जांच शुरू हुई। शव की पहचान सुनीता के रूप में हुई। घर न लौटने पर उनके परिवार ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दुखद यह रहा कि शव मिलने के कुछ दिनों बाद सुनीता के पति राजेश ने सदमे में आत्महत्या कर ली।
यह मामला शुरू में ठंडा पड़ गया था। लेकिन महासमुंद जिले में नए पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के आने के बाद जांच ने रफ्तार पकड़ी। उन्होंने पुराने अनसुलझे मामलों पर फोकस किया। तुमगांव थाने के इंस्पेक्टर दिनेश कुमार यादव ने बताया कि वे तकनीकी सबूतों की तलाश में जुटे। एक साल पुरानी सीसीटीवी फुटेज में सूरज को सुनीता के साथ मोटरसाइकिल पर जाते देखा गया। यह बाइक उसके रिश्तेदार की थी। इसी सुराग से पुलिस सूरज तक पहुंची और 17 जनवरी 2025 को उसे गिरफ्तार कर लिया। अब सूरज पर हत्या, सबूत मिटाने और चोरी के आरोप हैं।


