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अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य होने पर आख़िर क्या है विवाद?
20-Jan-2026 4:10 PM
 अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य होने पर आख़िर क्या है विवाद?

आर.के. जैन

माघ मेला प्रयागराज में चल रहा है। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या स्नान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान नहीं करने देने पर बवाल मचा हुआ है। यह आरोप है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थकों को पुलिस ने जमकर पीटा। वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए थे।

इस बवाल के बीच लोगों के जेहन में सवाल उठ रहे हैं कि देश में कितने मठ हैं और इनके शंकराचार्य कौन हैं, तो आइए जानते हैं इनके बारे में।

1. ज्योतिर्मठ, उत्तराखंड
भारत में चार प्रमुख मठ हैं, जिनकी स्थापना आदि शंकराचार्य ने देश के चारों दिशाओं में स्थापित किया था। उत्तर भारत के उत्तराखंड के चमोली जिले में ज्योतिर्मठ है। इसके वर्तमान में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती हैं।

हालांकि, इनके शंकराचार्य को लेकर विवाद बना हुआ है। अन्य मठों के शंकराचार्य इनको शंकराचार्य नहीं मानते हैं। इनके शंकराचार्य बनने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है। दरअसल इन्होंने अपने गुरु के निधन के बाद खुद को शंकराचार्य घोषित कर लिया था।

2.शारदा मठ, द्वारका, गुजरात
शारदा मठ सबसे प्रमुख माना गया है। यह मठ गुजरात के द्वारका में स्थित है। इसके अलावा कश्मीर के शारदा गांव में एक प्राचीन ज्ञान केंद्र है। साथ ही केरल में श्री नारायण गुरु और कोलकाता रामकृष्ण मठ से संबंधित मठ है। यह विद्या की देवी सरस्वती को समर्पित मठ है और आध्यात्मिक शिक्षा व सेवा प्रदान करते हैं। शारदा मठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती हैं।

3.गोवर्धन मठ, पुरी, ओडिशा
गोवर्धन मठ भारत के ओडिशा राज्य के पुरी में स्थित है। यह पूर्व दिशा में स्थित है। यह अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार करता है। इसके शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती है।

4. श्रृंगेरी मठ, कर्नाटक
श्रृंगेरी मठ दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले के तुंगा नदी के किनारे स्थित है। इसको श्रृंगेरी शारदा पीठम भी कहते हैं। इसके शंकराचार्य भारती तीर्थ पीठ हैं। ये भी अपना अहम स्थान रखता है।

 

सोमवार को यूपी के अफसरों ने अविमुक्तेश्वरानंद के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत उनको शंकराचार्य का प्रोटोकॉल देने का कोई प्रावधान नहीं है तथा पहले भी उन्हें माघ मेले में कभी भी शंकराचार्य के रूप में सुविधा नहीं दी गई है।

यह जानना भी ज़रूरी है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के गुरु यानी ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य रहे स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उनको कभी भी अपना उत्तराधिकारी नहीं बनाया। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद खुद ही अविमुक्तेश्वरानंद ने शंकराचार्य घोषित कर लिया। इसको लेकर विवाद बना हुआ है।

2025 महाकुंभ में एकसाथ तीन शंकराचार्यों ने मिलकर स्नान किया था । द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती, शृंगेरी मठ के शंकराचार्य श्री विधुशेखर भारती , और ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ महाकुंभ मेला 2025 के दौरान साथ में डुबकी लगाई थी।

पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भी मेले में आए थे, लेकिन वह शंकराचार्यों के साथ स्नान के लिए नहीं गए थे।


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