ताजा खबर
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने शनिवार को कहा कि मलयालम भाषा विधेयक, 2025 को लेकर जताई गईं आशंकाएं तथ्यों को नहीं दर्शाती हैं.
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान जारी कर यह बात कही है.
उन्होंने कहा, "इस विधेयक में भाषाई अल्पसंख्यकों, खासतौर पर कन्नड़ और तमिल भाषी समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट नॉन-ऑब्स्टैंटे क्लॉज़ (क्लॉज़ 7) शामिल है. विधेयक के मुख्य प्रावधान यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी भाषा को थोपा नहीं जाएगा और भाषाई स्वतंत्रता पूरी तरह सुरक्षित रहेगी."
नॉन-ऑब्स्टैंटे क्लॉज़, एक ऐसा क़ानूनी प्रावधान है जो किसी अन्य क़ानून से विवाद या विरोधाभास की स्थिति में नॉन-ऑब्स्टैंटे क्लॉज़ वाले क़ानून को प्राथमिकता देता है.
इससे एक दिन पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पिनाराई विजयन को पत्र लिखकर इस विधेयक पर गंभीर चिंता जताई थी.
सिद्धारमैया ने शुक्रवार को कहा था कि अगर यह विधेयक पारित होता है तो कर्नाटक, भाषाई अल्पसंख्यकों और देश की बहुलतावादी भावना की रक्षा के लिए मौजूद हर संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करेगा और इसका विरोध करेगा.
इस विधेयक को अभी केरल के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर की मंज़ूरी मिलना बाकी है. कर्नाटक बॉर्डर एरियाज़ डेवलपमेंट अथॉरिटी (केबीएडीए) ने उनसे इस पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है.
वहीं, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केरल से इस विधेयक को वापस लेने की अपील की है.
मलयालम भाषा विधेयक पर क्या है विवाद?
केरल मलयालम भाषा विधेयक, 2025 पिछले साल अक्तूबर में विधानसभा में पारित किया गया था. इस विधेयक को विषय समिति के पास भेजा गया था, जिसने तीन दिन बाद इसे मंज़ूरी दे दी थी.
यह विधेयक केरल के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में 10वीं कक्षा तक मलयालम को अनिवार्य पहली भाषा बनाता है.
इस विधेयक को अभी केरल के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर की मंज़ूरी मिलना बाकी है.
5 अक्तूबर को केरल विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए कानून मंत्री पी राजीव ने कहा था कि यह विधेयक भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना चाहता है, जिसमें वे नागरिक भी शामिल हैं जो तमिल, कन्नड़, तुलु और कोंकणी को अपनी मातृभाषा मानते हैं.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, इस विधेयक में मलयालम को राज्य की आधिकारिक भाषा घोषित किया गया. इसके साथ ही सरकारी सेवाओं और न्यायपालिका समेत अन्य क्षेत्रों में मलयालम भाषा के इस्तेमाल का प्रावधान है.
विधेयक में मलयालम भाषा विकास प्राधिकरण की स्थापना की बात भी कही गई है. इसके अलावा, केरल में बेचे जाने वाले या वहां बनने वाले सभी उत्पादों पर मलयालम भाषा में लेबल होना भी ज़रूरी होगा. (bbc.com/hindi)


