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सकरी मिडिल स्कूल में कुत्तों का हमला- तीन बच्चे घायल, सुरक्षा आदेश बेअसर
07-Jan-2026 11:47 AM
सकरी मिडिल स्कूल में कुत्तों का हमला- तीन बच्चे घायल, सुरक्षा आदेश बेअसर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 7 जनवरी। सकरी क्षेत्र के मिडिल स्कूल में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक आवारा कुत्ता स्कूल परिसर में घुस आया। क्लासरूम के पास पहुंचे कुत्ते ने कक्षा 8वीं की छात्रा मोना यादव पर हमला कर उसके पैरों को बुरी तरह काट लिया। इसके बाद यादव मोहल्ला निवासी तमन्ना साहू, सूरज और नवदा गांव से आए एक अन्य बच्चे को भी घायल कर दिया। शिक्षकों ने काफी प्रयास के बाद बच्चों को कुत्ते के चंगुल से छुड़ाया।

हमले में घायल तीन बच्चों को इलाज के लिए सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि एक बच्चे का उपचार निजी अस्पताल में चल रहा है। घटना के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश देखा गया।

आवारा कुत्तों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए पहले ही सुप्रीम कोर्ट और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इस समस्या के समाधान के लिए कमेटी बनाकर निर्देश जारी किए थे। इसके पालन में लोक शिक्षण संस्थान ने स्कूलों के प्राचार्य और प्रधान पाठकों को परिसर में कुत्तों की एंट्री रोकने की जिम्मेदारी सौंपी थी। बावजूद इसके, दो माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। कुछ दिन पहले खमतराई स्कूल में भी एक छात्र और दो शिक्षिकाओं को कुत्तों ने काट दिया था। इस मामले पर भी हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है।

खमतराई स्कूल की पूर्व घटना के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने सख्ती के दावे किए थे, लेकिन सकरी स्कूल की ताजा घटना ने इन दावों की पोल खोल दी। न तो स्कूल परिसरों में कुत्तों को रोकने के उपाय किए गए और न ही नगर निगम की डॉग कैचर टीम सक्रिय दिखाई दी।

नगर निगम, जनपद और पंचायत स्तर के अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों से कुत्तों को पकड़ने के लिए नियमित शिकायतें नहीं मिलतीं। जब तक लिखित सूचना नहीं आती, कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि समस्या जस की तस बनी हुई है।

जिला शिक्षा विभाग के अनुसार जिले के 49 स्कूल ऐसे हैं, जहां बाउंड्रीवाल ही नहीं है। कुछ स्कूलों की दीवारें भी इतनी जर्जर हैं कि कुत्ते आसानी से भीतर घुस जाते हैं। इससे बच्चों की सुरक्षा पर लगातार खतरा बना हुआ है। खमतराई स्कूल, जहां दो शिक्षिकाओं और एक छात्र भी डॉग बाइट के शिकार हुआ, वहां बाउंड्रीवाल की ऊंचाई कम होने के कारण कुत्ते व अन्य मवेशी भीतर प्रवेश करते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए ठोस रणनीति नहीं बनाई गई, तो स्कूल परिसरों में कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग और स्थानीय निकायों की लापरवाही अब सवालों के घेरे में है।


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