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नयी दिल्ली, 19 दिसंबर। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को बेंगलुरु के एक निवासी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार दिया, जिसने कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट की थी।
न्यायालय ने कहा कि आरोपी को उन लोगों के लिए कोई पछतावा या अफसोस नहीं है, जिन्हें उसने अपशब्द कहे थे।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध सोशल मीडिया पर आलोचनात्मक पोस्ट करने के आरोप में 24 वर्षीय गुरुदत्त शेट्टी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
पीठ ने आदेश दिया, ‘‘याचिकाकर्ता ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का खुलेआम उल्लंघन किया है। हम इस स्तर पर कोई राहत नहीं दे सकते।’’
हालांकि, शीर्ष न्यायालय ने कहा कि शेट्टी उचित क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालय में जाकर कानूनी उपाय प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र हैं।
जब शेट्टी के वकील ने एक बार फिर सात दिन के संरक्षण के लिए जोर दिया, तो प्रधान न्यायाधीश ने दृढ़ता से इनकार करते हुए कहा, ‘‘संरक्षण का कोई सवाल ही नहीं उठता।’’
शेट्टी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 336(4) और धारा 79 के तहत संज्ञेय और जमानती अपराधों का मामला दर्ज किया गया था।
शुरुआत में, शेट्टी के वकील ने कहा कि वह बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं और उन्होंने निवेदन किया कि वह केवल कुछ दिनों के लिए संरक्षण मांग रहे हैं, ताकि वे संबंधित उच्च न्यायालय में अपील कर सकें। (भाषा)


