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गुरु घासीदास जयंती समारोह में आरएसएस के शामिल होने पर विवाद
19-Dec-2025 2:05 PM
 गुरु घासीदास जयंती समारोह में आरएसएस के शामिल होने पर विवाद

छत्तीसगढ़' संवाददाता 

बिलासपुर, 19 दिसंबर। गुरु घासीदास जयंती के एक समारोह के दौरान बहस और बड़ा विवाद सामने आया है। सतनामी समाज के आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों के आने पर आयोजक युवाओं ने तीखा विरोध जताया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया और अन्त में आर एस एस के पदाधिकारी समारोह से लौटने को मजबूर हो गए।

कल 18 दिसंबर को महंत बाड़ा के महंत बसंत अंचल के नेतृत्व में गुरु घासीदास जयंती समारोह का आयोजन किया गया था, जिसमें श्रद्धालु अपने श्रद्धा भाव के साथ पूजा-अर्चना में शामिल हुए। इसी बीच एक महंत के आमंत्रण पर आरएसएस के कुछ पदाधिकारी और स्वयंसेवक भी समारोह स्थल पर आए।

समारोह में आरएसएस के पदाधिकारियों को सतनामी समाज के युवक और अन्य लोगों ने उन्हें देखा, युवाओं ने आपत्ति जतानी शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन धार्मिक और सामाजिक है और इसमें राजनीतिक या संगठनात्मक हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। विरोध बढ़ने पर युवा नारेबाजी करने लगे और आरएसएस के पदाधिकारियों से वापस जाने की मांग की।

विरोध कर रहे युवाओं ने जोर से नारे लगाए और कहा कि यहां नहीं रहना है, वापस जाओ।कुछ युवक सीधे तौर पर आरएसएस के खिलाफ नारों में लग गए, जिससे समारोह स्थल पर माहौल तनावपूर्ण हो गया। विरोध की यह स्थिति तब तक बनी रही जब तक आरएसएस के पदाधिकारी कार्यक्रम से वापस नहीं लौट गए।

कार्यक्रम में उपस्थित महंत बासंत अंचल ने विरोध कर रहे युवाओं को समझाने की कोशिश की और गुरु घासीदास के आदर्श मनखे-मनखे एक समान का उल्लेख करते हुए कहा कि बाबा का यह संदेश सभी के लिए है और किसी एक समूह तक सीमित नहीं है। लेकिन विरोध कर रहे युवाओं ने महंत की भी नहीं सुनी और नारेबाजी जारी रखी।

इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें उस समय का तनावपूर्ण माहौल दिख रहा है जब युवाओं ने विरोध करते हुए आरएसएस के लोगों को वापस जाने के लिए कहा और कार्यक्रम स्थल पर हंगामा शुरू हो गया।

मालूम हो कि गुरु घासीदास सतनाम पंथ के प्रवर्तक संत थे, जिन्होंने सामाजिक बराबरी और समानता का संदेश दिया। उनकी जयंती छत्तीसगढ़ और अन्य जगहों पर श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।

इधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) एक स्वयंसेवी संगठन है जिसकी पहचान हिंदुत्ववादी विचारधारा से है और यह समाज में संगठनात्मक गतिविधियां भी करता है।


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