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दोनों राज्यों की सीमा से लगे जंगलों में पेड़ सूखने लगे
छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 16 दिसंबर। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के साल (सरई) वनों पर एक बार फिर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। सात साल बाद साल बोरर नामक कीट के दोबारा फैलने की आशंका जताई जा रही है। दोनों राज्यों की सीमा से लगे जंगलों में पेड़ों के सूखने की खबरें सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई वन क्षेत्र आपस में जुड़े हुए हैं। ऐसे में यदि दोनों राज्य अलग-अलग प्रयास करेंगे तो स्थिति पर काबू पाना मुश्किल होगा। संयुक्त निगरानी और साझा रणनीति ही इस संकट से निपटने का प्रभावी तरीका हो सकता है।
छत्तीसगढ़ के कोरबा और सरगुजा संभाग के साल वनों में पेड़ों के सूखने की खबरें सामने आई हैं। वहीं मध्यप्रदेश के अमरकंटक क्षेत्र में भी करीब दो महीने पहले बड़ी संख्या में साल के पेड़ों के सूखने के प्रमाण मिले थे। जानकारों के अनुसार यह साल बोरर के हमले के स्पष्ट संकेत हैं।
इतिहास बताता है कि मध्यप्रदेश में साल बोरर का हमला 1899, 1925, 1950, 1960 और 1995 में हो चुका है। आम तौर पर साल को लंबी आयु का वृक्ष माना जाता है, लेकिन यह छोटा सा कीट कुछ ही समय में सैकड़ों साल पुराने पेड़ों को नष्ट कर देता है।
वन विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि साल का पौधा नर्सरी में आसानी से तैयार नहीं होता और जलवायु परिवर्तन के कारण इसका प्राकृतिक अंकुरण भी घटा है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में साल की व्यावसायिक कटाई पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद साल बोरर जैसे कीटों से निपटने के लिए ठोस, समयबद्ध कार्रवाई की कमी दिखाई देती है।
पर्यावरण प्रेमी प्राण चड्ढा का मानना है कि स्थिति चिंताजनक है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। पहले भी गलत फैसलों के चलते लाखों पेड़ों की कटाई करनी पड़ी थी। अब जरूरत है कि दोनों राज्य सरकारें समन्वित योजना, वैज्ञानिक निगरानी और त्वरित कार्रवाई पर ध्यान दें, ताकि साल के वनों को बचाया जा सके।


