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सौम्या चौरसिया को एक और झटका
17-Dec-2025 11:14 AM
सौम्या चौरसिया को एक और झटका

348 करोड़ की कथित कर चोरी मामले में अभियोजन को मंज़ूरी

रायपुर, 17 दिसंबर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की दूसरी बार गिरफ्त में आने के बाद अब दिल्ली हाई कोर्ट से भी उन्हें बड़ा झटका लगा है। अदालत ने 348 करोड़ रुपये की कथित कर चोरी के मामले में उनके खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति दे दी है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सौम्या चौरसिया की याचिका को खारिज करते हुए आयकर विभाग द्वारा मुकदमा चलाने के फैसले को सही ठहराया है। इसके साथ ही अदालत ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के परिपत्र संख्या 5/2020 को भी वैध ठहराया है, जो तलाशी मामलों में अपीलीय मंच पर जुर्माना तय होने से पहले ही अभियोजन की अनुमति देता है।

न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति विनोद कुमार की खंडपीठ ने कहा कि प्रधान आयकर आयुक्त (पीसीआईटी) द्वारा दी गई अभियोजन स्वीकृति कानून के दायरे में है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं करती। अदालत ने साफ किया कि यह परिपत्र केवल बड़े और गंभीर मामलों में शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है, न कि छोटे मामलों में मनमानी कार्रवाई के लिए।

यह मामला वर्ष 2020 में उस समय सामने आया था, जब आयकर विभाग ने राज्य भर में व्यापारिक लेन-देन से जुड़ी कथित असंरक्षित आय की जांच के दौरान सौम्या चौरसिया के भिलाई स्थित निवास पर तलाशी ली थी। बाद में यह मामला दिल्ली में केंद्रीकृत कर दिया गया। जांच में 2011-12 से 2022-23 तक के आठ वित्तीय वर्षों को शामिल करते हुए 348 करोड़ रुपये से अधिक की कर मांग सामने आई।

इसी दौरान पिछली राज्य सरकार के कार्यकाल में कथित कोयला लेवी और शराब नीति से जुड़े मामलों में ईडी और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू/एसीबी) द्वारा भी सौम्या चौरसिया के खिलाफ समानांतर जांच चलती रही। उन्हें वर्ष 2022 में गिरफ्तार किया गया था और 2024 में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें अंतरिम जमानत मिली थी।

अब पीसीआईटी की स्वीकृति के बाद आयकर अधिनियम की धारा 276सी (जानबूझकर कर चोरी का प्रयास) और धारा 278ई (दोषी मानसिक स्थिति की कानूनी धारणा) के तहत उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया है।

सौम्या चौरसिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बलबीर सिंह ने अदालत में दलील दी थी कि आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) द्वारा जुर्माने की पुष्टि के बाद ही अभियोजन शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अभियोजन की मंजूरी में पर्याप्त कारण नहीं बताए गए हैं और सीबीडीटी के परिपत्र कर अधिकारियों को मनमाना अधिकार देते हैं।

हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि आयकर अधिनियम की धाराओं 132, 132ए और 133ए के तहत तलाशी और सर्वे के मामलों में, पीसीआईटी की पूर्व अनुमति से किसी भी स्तर पर अभियोजन शुरू किया जा सकता है। अदालत के अनुसार, कथित कर चोरी की गंभीरता और बड़े पैमाने को देखते हुए तत्काल कार्रवाई उचित है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जब्त दस्तावेजों की साक्ष्य क्षमता और तथ्यों से जुड़े विवादों का फैसला कर अधिकारी करेंगे, न कि रिट याचिका के ज़रिये उच्च न्यायालय। अदालत ने साफ किया कि सीबीडीटी का परिपत्र न तो मनमाना है और न ही असंवैधानिक।

अब ईडी सौम्या चौरसिया को रिमांड पर लेने के लिए विशेष न्यायालय में पेश करने की तैयारी में है। ऐसे में कानूनी मोर्चे पर उनकी चुनौतियां और बढ़ने के संकेत हैं।


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