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भू-स्वामी की आपत्तियों को सुनकर नए सिरे से आदेश पारित करना होगा भू-अर्जन अधिकारी को
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 14 दिसंबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेलवे के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक मामले में भू अर्जन अधिकारी के आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जमीन मालिक की आपत्ति पर बिना समुचित सुनवाई के निर्णय लेना कानूनन गलत है। हाईकोर्ट ने पूरे मामले की दोबारा सुनवाई कर नया निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
मामला बिलासपुर जिले के बेलगहना गांव का है। यहां रेलवे प्रशासन ने विद्युत उपकेंद्र निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव के आधार पर भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने रेलवे अधिनियम की धारा 20 के तहत अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करते हुए अधिसूचना जारी की थी।
अधिसूचना जारी होने के बाद जमीन मालिक प्रदीप अग्रवाल ने अधिग्रहण के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई थी। आपत्ति में उन्होंने स्पष्ट किया था कि संबंधित भूमि कृषि भूमि है और उनकी आजीविका पूरी तरह इसी पर निर्भर है। साथ ही यह भी बताया गया था कि रेलवे के पास वैकल्पिक भूमि उपलब्ध है, जिसके चलते इस जमीन का अधिग्रहण आवश्यक नहीं है।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने उनकी आपत्ति पर न तो विस्तृत सुनवाई की और न ही सभी पक्षों को सुना। आपत्ति खारिज के बाद प्रदीप कुमार अग्रवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अधिग्रहण अधिकारी के आदेश को चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि रेलवे अधिनियम की धारा 20 के तहत भूमि अधिग्रहण अधिकारी का दायित्व है कि वह आपत्तियों पर विस्तार से सुनवाई करे और सभी पक्षों को सुनने के बाद ही निर्णय दे। कोर्ट ने माना कि इस मामले में वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण अधिकारी के आदेश को रद्द करते हुए पूरे मामले की नए सिरे से सुनवाई करने और कानून के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।


