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लोकसभा में शुक्रवार को ज़ीरो आवर के दौरान बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने तमिलनाडु सरकार पर 'एंटी सनातन धर्म' का आरोप लगाया है.
उन्होंने कहा कि मद्रास हाई कोर्ट ने कार्तिगई दीपम जलाने के पक्ष में आदेश दिया था, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार ने श्रद्धालुओं को मंदिर की ओर बढ़ने से रोका और पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया.
उनका कहना है कि 'लोगों को मंदिर तक पहुंचने के लिए अदालत का रुख करना पड़ा'.
अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि अदालत के आदेश के बावजूद हिन्दू भक्तों को दीप प्रज्वलित करने की अनुमति नहीं दी गई.
उनका कहना है, "देश का एक राज्य एंटी सनातन धर्म का प्रतीक बन गया है और वहां के मंत्री लगातार हिन्दू विरोधी बयान दे रहे हैं."
उनके इस बयान पर डीएमके सांसदों ने संसद में कड़ा विरोध जताया.
क्या मामला है?
मदुरै ज़िले के तिरुपरनकुंड्रम में सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर स्थित है, और दूसरी ओर सुल्तान बादुशा सिकंदर औलिया दरगाह है.
हर साल कार्तिगई दीपम के दिन सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के पिल्लैयार मंदिर दीपम मंडपम में दीप प्रज्वलित करने की प्रथा है. इस स्थिति में, हिंदू संगठनों ने पहाड़ी की चोटी पर स्थित दीपपथून में दीप प्रज्वलित करने की मांग रखी थी.
न्यायाधीश जी.आर. स्वामीनाथन ने आदेश दिया था कि महादीपम को तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी की चोटी पर स्थित दीपपथून में प्रज्वलित किया जाना चाहिए.
इसके बाद पिल्लैयार मंदिर के दीपक कक्ष में दीप जलाया गया, जहां आमतौर पर 3 दिसंबर को दीप जलाया जाता है.
हालांकि, हिंदू संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया और दावा किया कि महादीपम पहाड़ की चोटी पर स्थित दीपक कक्ष में नहीं जलाया गया था.
उस समय पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई.
याचिकाकर्ताओं में से एक रामा रविकुमार ने अदालत की अवमानना का मामला दायर किया, जिसमें दावा किया गया कि मंदिर प्रशासन ने दीपपथून में महादीपम को प्रज्वलित करने का कोई प्रयास नहीं किया था.
इस मामले में न्यायाधीश जी.आर. स्वामीनाथन ने याचिकाकर्ता रामा रविकुमार को तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी की चोटी पर दीपक जलाने की अनुमति दी.
ये आदेश दिया कि वह अपने साथ 10 लोगों को ले जा सकते हैं और 3 दिसंबर की शाम को सीआईएसएफ़ कर्मियों द्वारा उन्हें सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए.
हालांकि, पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी. (bbc.com/hindi)


