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तलाक के खिलाफ पत्नी की अपील खारिज, हाईकोर्ट ने बीमारी छिपाने को माना मानसिक क्रूरता
11-Dec-2025 12:13 PM
तलाक के खिलाफ पत्नी की अपील खारिज, हाईकोर्ट ने बीमारी छिपाने को माना मानसिक क्रूरता

फैमिली कोर्ट का आदेश बरकरार

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 11 दिसंबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट द्वारा पति की याचिका पर तलाक मंजूर करने के आदेश को सही ठहराते हुए पत्नी की अपील नामंजूर कर दी है। कोर्ट ने माना कि शादी से पहले गंभीर बीमारी छिपाना और विवाह के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों से दूरी बनाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है, इसलिए तलाक का आदेश उचित है।

कांकेर जिले के इस मामले में दंपती की शादी 5 जून 2015 को हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। शुरुआती दो महीने सबकुछ सामान्य रहा, लेकिन जल्द ही घर का माहौल तनावपूर्ण होने लगा।

पति ने तलाक याचिका में कहा कि पत्नी को शादी से पहले पीरियड्स न आने की समस्या थी, लेकिन उसने यह जानकारी छिपाई। बीमारी का असर उनके दाम्पत्य जीवन और भविष्य की योजनाओं पर पड़ा, जिससे वह मानसिक तनाव में रहने लगा।

पति ने अदालत को बताया कि कुछ महीनों बाद पत्नी का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। वह घर के बुजुर्ग माता-पिता सहित किसी की जिम्मेदारी नहीं निभाती थी, घरेलू काम में हाथ बंटाने से इनकार करती थी। परिवार पर अपमानजनक टिप्पणियाँ करती थी और कहती थी कि क्या अनाथालय खोल रखा है? फैमिली कोर्ट ने पति के आरोपों को सही मानते हुए तलाक मंजूर किया था। पत्नी ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेश कुमार प्रसाद की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान पाया कि पति-पत्नी के बीच संबंध सुधरने की कोई संभावना नहीं है। बीमारी छिपाना व वैवाहिक कर्तव्य न निभाना मानसिक क्रूरता है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार रखा और पत्नी की अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि पति चार महीने के भीतर पत्नी को पांच लाख रुपये स्थायी भरण-पोषण के रूप में अदा करे।


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