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चुनाव सुधार पर संसद में चर्चा के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को सरकार से तीन सवाल पूछे थे. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में इन सवालों का जवाब दिया.
राहुल गांधी का पहला सवाल था कि 'चुनाव आयुक्त के चयन प्रक्रिया से सीजेआई को क्यों हटाया गया?'
इस पर अमित शाह ने कहा, "73 सालों तक इस देश में चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का कोई क़ानून नहीं था, नियुक्ति प्रधानमंत्री सीधे तौर पर करते थे. 1950 से 1989 तक चुनाव आयोग एक सदस्यीय था. पूरे 55 साल प्रधानमंत्री जी ने ही चुनाव आयुक्त नियुक्त किया, तब तक कोई सवाल नहीं उठाया गया."
उन्होंने कहा, "जब 1989 में चुनाव आयुक्त उनकी सुनते नहीं थे, तब पहली बार उन पर ब्रेक लगाने के लिए आयोग को बहुसदस्यीय किया गया. मगर वो भी प्रधानमंत्री की फाइल से चुने गए."
गृह मंत्री ने कहा, "कांग्रेस पार्टी ने ही ये परंपरा बनाई, क़ानून भी कांग्रेस ने ही बनाया था. मगर आज आरोप लगाना है इसलिए 'चुनाव चोरी कर लिया' कह रहे हैं."
उन्होंने कहा, "2023 में क़ानून बना कि विपक्ष के नेता, प्रधानमंत्री और एक अन्य मंत्री मिलकर चुनाव आयुक्त चुनेंगे. ये लोग (विपक्ष) कह रहे हैं कि हमारा 33 प्रतिशत हिस्सा है. कम से कम 33 प्रतिशत हिस्सा तो है न? हमारा तो हिस्सा ही नहीं था."
राहुल गांधी ने दूसरा सवाल किया कि '2024 चुनाव से पहले चुनाव आयुक्त को लगभग पूरी क़ानूनी इम्युनिटी क्यों दी गई?'
इस पर अमित शाह ने कहा, "जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 में ही ईसीआई के अधिकारियों को जो इम्युनिटी प्राप्त है, उसमें ज़रा भी बढ़ोतरी नहीं की है. हमने सिर्फ़ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में पुनरावृत्ति की है."
राहुल गांधी ने तीसरा सवाल किया कि 'सीसीटीवी फुटेज 45 दिनों में नष्ट करने की इतनी जल्दबाज़ी क्यों?'
इस पर अमित शाह ने कहा, "जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 81 में एक प्रावधान है. उम्मीदवार चुने जाने के बाद 45 दिन में चुनाव याचिका दायर कर सकते हैं. 45 दिन के बाद इसको कोई चुनौती नहीं दे सकता. जब यह नियम बना उस वक्त सीसीटीवी फुटेज नहीं था. बाद में चुनाव आयोग ने एक सर्कुलर जारी कर नियमों में इसे जोड़ा."
"चुनाव आयोग ने सीसीटीवी फुटेज के रिकॉर्ड को जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 81 के साथ संरक्षित किया है. जब 45 दिन के बाद चुनौती का प्रावधान ही नहीं है तो सीसीटीवी फुटेज क्यों रखना?"
अमित शाह ने कहा, "जब इसे प्रक्रिया में जोड़ा गया तब स्पष्ट तौर पर चुनाव आयोग ने कहा कि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग संवैधानिक दस्तावेज नहीं है, यह आंतरिक प्रबंधन है." (bbc.com/hindi)


