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-इमरान क़ुरैशी
कर्नाटक हाई कोर्ट ने मंगलवार को एडवोकेट जनरल के दख़ल के बाद राज्य सरकार की मेंस्ट्रुअल लीव के नोटिफ़िकेशन पर अंतरिम रोक लगाने के अपने सुबह दिए गए फ़ैसले को बदल दिया है.
कर्नाटक सरकार के नोटिफ़िकेशन के ख़िलाफ़ बेंगलुरु होटल्स एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन और अविराता एएफ़एल कनेक्टिविटी सिस्टम्स लिमिटेड ने याचिका दायर की थी.
मंगलवार सुबह याचिकाकर्ताओं की दलील सुनने के बाद जस्टिस ज्योति एम ने राज्य सरकार की मेंस्ट्रुअल लीव के नोटिफ़िकेशन पर अंतरिम रोक लगा दी थी.
याचिका में सरकार के 20 नवंबर के नोटिफ़िकेशन को चुनौती दी गई थी, जिसमें विभिन्न क़ानूनों के तहत सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों में महिलाओं को हर महीने एक दिन की पेड मेंस्ट्रुअल लीव देने की बात कही गई है.
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि नोटिफ़िकेशन में बताए गए क़ानूनों में कोई ख़ास प्रावधान महिला कर्मचारियों को मेंस्ट्रुअल लीव नहीं देता है, उसमें कोई क़ानून भी नहीं था.
सुबह मामले की सुनवाई करते हुए, जज ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि क्या सरकार ने नोटिफ़िकेशन जारी करने से पहले उनकी राय ली थी.
जब याचिकाकर्ताओं ने इससे इनकार किया, तो जज ने सरकारी वकील से याचिकाओं पर ध्यान देने को कहा और अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी.
हालांकि, कोर्ट के लंच के लिए उठने से पहले, एडवोकेट जनरल शशि किरण शेट्टी बेंच के सामने पेश हुए. उन्होंने बताया कि वह कोर्ट को सूचित करना चाहते हैं कि अंतरिम आदेश के ख़िलाफ़ अपील दायर करने के बजाय वह कोर्ट के ध्यान में लाना चाहते हैं कि उसका फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों के ख़िलाफ़ है.
उनके दख़ल के बाद, कोर्ट ने अपने पहले के आदेश को बदल दिया और मामले को कल यानी बुधवार को सुनवाई के लिए लिस्ट करने को कहा.
पेड मेंस्ट्रुअल लीव का मुद्दा राज्य सरकार के लिए प्रतिष्ठा का विषय है क्योंकि सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की महिला कर्मचारियों के लिए ऐसा प्रावधान करने वाला कर्नाटक पहला राज्य है.
वहीं बिहार देश का पहला राज्य है जो 1991 से सरकारी क्षेत्र में हर महीने दो दिन की पेड मेंस्ट्रुअल लीव देता है. (bbc.com/hindi)


