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छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 4 दिसंबर। सरगुजा ज़िले के अमेरा ओपनकास्ट माइंस में सोमवार को हुए उपद्रव को लेकर दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड ने आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की है। कंपनी का कहना है कि कोयला चोरी और अवैध गतिविधियों से जुड़े कुछ तत्वों ने ग्रामीणों को जानबूझकर उकसाया, जिसके कारण शांत माहौल अचानक हिंसक हो गया।
एसईसीएल के अनुसार, अमेरा ओपनकास्ट परियोजना 1.0 एमटीपीए क्षमता वाली खदान है, जिसका क्षेत्र परसोडीकला, अमेरा, पूहपुटरा और कटकोना गांवों में फैला है। लगभग 664 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण वर्ष 2001 में किया गया, जिसके बाद 2011 में खनन गतिविधि शुरू हुई।
साल 2019 तक उत्पादन सुचारू रूप से चलता रहा। इस बीच कुछ ग्रामीणों ने स्वीकृत नियमों से अधिक मुआवज़े और लाभ की मांग शुरू कर दी। एसईसीएल का दावा है कि ग्रामीणों को कोयला चोरी में शामिल असामाजिक लोग भड़का रहे थे। कई मामलों में पुलिस में एफआईआर भी दर्ज की गई है।
लंबे समय तक विवाद के बाद वर्ष 2024 में जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप कर अतिरिक्त भूमि का कब्जा दिलाया। प्रभावित परिवारों को निर्धारित मुआवज़ा और पुनर्वास लाभ दिए गए। परसोडीकला गांव के लोगों को करीब 10 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है।
कंपनी ने बताया कि जैसे ही खनन क्षेत्र परसोडीकला की ओर बढ़ा, एक बार फिर बाहरी तत्व सक्रिय हुए और ग्रामीणों ने भूमि खाली करने से मना कर दिया, जबकि यह जमीन कोल बेयरिंग अधिनियम, 1957 के तहत अधिग्रहीत है। स्थिति इतनी बढ़ी कि 8 नवंबर 2025 से खदान संचालन फिर बंद करना पड़ा।
एसईसीएल ने कहा कि 3 दिसंबर की सुबह जिला प्रशासन एएसपी, एसडीएम और तहसीलदार ग्रामीणों से बातचीत कर समाधान निकालने पहुंचे, लेकिन भीड़ ने अचानक पथराव शुरू कर दिया, जिसमें एएसपी सहित कई अधिकारी घायल हुए।
दोपहर एक बजे अपर कलेक्टर पहुंचे, परंतु भीड़ और उग्र हो गई और उन पर भी हमला कर दिया।
स्थिति को बिगड़ते देख अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया और उपद्रवी समूह को तितर-बितर किया गया।
शाम 5 बजे से खनन उपकरणों को पुनः संचालित कर आंशिक रूप से कार्य दोबारा शुरू किया गया।


