ताजा खबर
छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 3 दिसंबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बेमेतरा जिले के एक हत्या के मामले में मुख्य आरोपी संतकुमार बांधे की आजीवन कारावास के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी, लेकिन दो सह-आरोपियों रेखचंद उर्फ जितेंद्र देशलहरे और प्रेमचंद देशलहरे को साजिश (धारा 120बी) में मिली 10 साल की सजा रद्द कर दी। साथ ही कोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी को केवल साजिश में दोषी ठहराना तब उचित नहीं है, जब मुख्य अपराध में उसके शामिल होने के पर्याप्त सबूत मौजूद न हों या सबूतों की गलत व्याख्या की गई हो।
22 जुलाई 2022 को बेमेतरा जिले के बेरला थाना क्षेत्र के चोरियावंध गांव में हत्या की वारदात हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार संतकुमार बांधे, रेखचंद, प्रेमचंद और फरार आरोपी पारस उर्फ टहकू रात्रे ने मिलकर धर्मेंद्र देशलहरे की हत्या की साजिश रची। चारों ने आपराधिक इरादे से मृतक पर हमला किया और उसके गले, सिर व जबड़े पर ब्लेड, पत्थर व शराब की बोतल से जानलेवा चोटें पहुंचाकर उसकी हत्या कर दी।
सत्र न्यायालय ने 6 अप्रैल 2023 को संतकुमार बांधे को आईपीसी 302/34 के तहत उम्रकैद तथा रेखचंद और प्रेमचंद को 120 बी में 10–10 साल की कैद की सजा सुनाई थी।
डिवीजन बेंच ने फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने कई परिस्थितियों को सह-आरोपियों के खिलाफ माना, लेकिन मुख्य आरोप (302/34) में उन्हें दोषी ठहराने का स्पष्ट आधार नहीं दिया।
कोर्ट ने कहा कि जब मुख्य अपराध में शामिल होने के ठोस सबूत न हों, तो केवल साजिश की धारा लगाकर सजा देना उचित नहीं है।सबूतों की व्याख्या में असमानता से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है।
ट्रायल कोर्ट को हाईकोर्ट की सीख देते हुए कहा है कि ऐसे मामलों में भविष्य में अधिक सावधानी बरतें। हाईकोर्ट ने ट्रायल जज को निर्देश देते हुए कहा कि कई आरोपों से जुड़े मामलों में, खासकर परिस्थितिजन्य साक्ष्यों में हर स्थिति का सूक्ष्म और समान रूप से विश्लेषण जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह के मामलों का फैसला करते समय ट्रायल कोर्ट अधिक सावधानी बरते।
हाईकोर्ट के आदेश में मुख्य आरोपी संतकुमार बांधे की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया है।


