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दो माह में 570 ने हथियार डाले–आईजी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सुकमा, 2 दिसंबर। नक्सल कमांडर बारसे देवा के आत्मसमर्पण का हल्ला है, लेकिन बस्तर पुलिस ने इससे इंकार किया है।
शीर्ष नक्सल नेताओं में एक माड़वी हिड़मा की मुठभेड़ में मौत के बाद बड़ी संख्या में नक्सली आत्म समर्पण कर रहे हैं।
इन सबके बीच बारसे देवा (पीएलजीए बटालियन एक के कमांडर) के आत्मसमर्पण और पुनर्वास को लेकर अटकलें लगाई जा रही है। इस पर सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने स्पष्ट किया कि ज़िले में ऐसी जानकारी या परिस्थितियाँ 2 दिसंबर की शाम तक सामने नहीं आई हैं।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टलिंगम ने बताया कि सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत किए जा रहे सतत प्रयास बस्तर रेंज में उल्लेखनीय परिणाम दे रहे हैं। सिर्फ पिछले दो महीनों में ही 570 से अधिक माओवादी कैडर, जिनमें केंद्रीय समिति सदस्य सतीश, रूपेश तथा DKSZC Members रणिता, राजमन मांडवी, राजू सलाम, वेंकटेश और श्याम दादा शामिल हैं, हिंसा का रास्ता छोड़कर सामाजिक मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले चुके हैं।
आईजीपी बस्तर ने आगे कहा कि बारसे देवा, पप्पा राव, देवजी जैसे कैडरों को भी यह समझना होगा कि परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं। अब हिंसा और संघर्ष की राह पर बने रहने से न उन्हें और न ही अन्य कैडरों को किसी प्रकार का लाभ मिलने वाला है। इसके विपरीत, मुख्यधारा में लौटकर सम्मान, स्थिरता और नई शुरुआत का अवसर अभी उनके सामने है। इसलिए मुख्यधारा में लौटने के निर्णय को और टालने का कोई अर्थ नहीं है—सही फैसला लेने का यही सबसे उपयुक्त समय है।


